पासवर्ड की ज़रूरत होगी खत्म! दिल की धड़कन और सांस से अनलॉक होंगे फोन, वैज्ञानिकों ने खोजी नई टेक्नोलॉजी

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आज के समय में टेक्नोलॉजी बहुत आगे बढ़ गई है। हर फील्ड में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है। हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी अलग-अलग चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं, जो टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं। जैसे, हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हमारे हाथ में स्मार्टफोन होता है। किसी को मैसेज करने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग करने तक, हम अपने कई काम स्मार्टफोन के ज़रिए बहुत आसानी से पूरे कर सकते हैं। आज स्मार्टफोन ने पहले के मुकाबले बहुत तरक्की कर ली है। स्मार्टफोन एडवांस हो गए हैं। साइंटिस्ट इन स्मार्टफोन को और एडवांस बनाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।

अब आपको स्मार्टफोन या दूसरे डिवाइस के लिए पासवर्ड, पिन या बायोमेट्रिक लॉक याद रखने की ज़रूरत नहीं होगी। साइंटिस्ट ने एक नई लॉगिन टेक्नोलॉजी ईजाद की है जो आपके दिल की धड़कन और सांस लेने की हरकतों के आधार पर आपके डिवाइस को लॉक या अनलॉक कर सकती है। इस टेक्नोलॉजी का नाम 'वाइटल ID' रखा गया है।

यह टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?
यह टेक्नोलॉजी इंसान की सांस लेने और दिल की धड़कन से पैदा होने वाले माइक्रो वाइब्रेशन का इस्तेमाल करती है। ये वाइब्रेशन गर्दन के ज़रिए दिमाग तक पहुंचते हैं। हर इंसान की हड्डियों का स्ट्रक्चर और टिशू अलग-अलग होते हैं, इसलिए इन वाइब्रेशन का पैटर्न भी सबके लिए अलग होता है। इसीलिए इस टेक्नोलॉजी को बहुत सेफ़ माना जाता है। खास बात यह है कि इसके लिए फ़ोन में किसी नए हार्डवेयर की ज़रूरत नहीं होती। यह सॉफ़्टवेयर मौजूदा प्रीमियम फ़ोन में मौजूद मोशन सेंसर की मदद से काम कर सकता है। इस टेक्नोलॉजी को '2025 ACM कॉन्फ्रेंस ऑन कंप्यूटर एंड कम्युनिकेशंस सिक्योरिटी' में पेश किया गया था। भविष्य में, यह अलग-अलग ऐप्स, वेबसाइट और पेमेंट सिस्टम में लॉग इन करने के हमारे तरीके को पूरी तरह से बदल देगा।

रिसर्च के मुख्य नतीजे
न्यू जर्सी इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, टेम्पल यूनिवर्सिटी और टेक्सास A&M यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यह खोज की है। 'XR हेडसेट' का इस्तेमाल 10 महीने के टेस्ट में 52 पार्टिसिपेंट्स पर किया गया। इसमें, सिस्टम ने 95 परसेंट से ज़्यादा बार सही यूज़र की पहचान की। 98 परसेंट से ज़्यादा मामलों में, बिना इजाज़त वाले यूज़र्स को एक्सेस नहीं दिया गया। रिसर्चर्स ने एक 'फ़िल्टरिंग सिस्टम' बनाया है जो सिर्फ़ दिल की धड़कन और सांस पर फ़ोकस करता है, जिससे सिर की हरकत या पोज़िशन बदलने से होने वाली रुकावट खत्म हो जाती है।