BJP: लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए BJP को अभी कितने MP चाहिए? MP बंटवारे का 2029 से क्या लेना-देना है? जानें
- byvarsha
- 23 Jun, 2026
pc: tv9
देश में अभी कोई चुनाव नहीं है। लेकिन विपक्षी पार्टियों के बंटवारे की वजह से देश की पॉलिटिक्स गरम है। तृणमूल कांग्रेस अंदरूनी कलह की वजह से बंट गई है। पार्टी, ममता बनर्जी, के वजूद को ही नकारा जा रहा है। महाराष्ट्र में ठाकरे ग्रुप की हालत भी कुछ अलग नहीं है। हाल ही में ठाकरे ग्रुप के 9 में से 6 MP अलग हो गए। उद्धव ठाकरे के सामने एक नई पॉलिटिकल चुनौती खड़ी हो गई है। इन सब डेवलपमेंट को देखकर कई लोगों के मन में अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं, क्या यह सिर्फ एक इत्तेफाक है, क्या ये नॉर्मल डेवलपमेंट हैं, या यह BJP की पार्लियामेंट में दो-तिहाई बहुमत पाने की कोई सोची-समझी स्ट्रैटेजी है? 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए BJP किस सोच के साथ काम कर रही है?
BJP पिछले 12 सालों से देश की सत्ता में है। 2029 में BJP इस सत्ता के 15 साल पूरे कर लेगी। BJP की सीनियर लीडरशिप को पूरी तरह पता है कि 2029 का चुनाव 2024 के चुनाव के मुकाबले मुश्किल होगा। इसीलिए BJP दो मुद्दों पर खास ध्यान दे रही है, 'महिला आरक्षण' और 'डीलिमिटेशन' चुनाव क्षेत्र का पुनर्गठन। इससे न सिर्फ लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि भूगोल और आबादी के हिसाब से चुनाव क्षेत्र की बनावट भी बदलेगी।
इस एक्सपेरिमेंट के नतीजे जम्मू-कश्मीर और असम में देखने को मिले हैं। जम्मू-कश्मीर में चुनाव क्षेत्र के पुनर्गठन के बाद जम्मू डिवीज़न में 6 नए विधानसभा क्षेत्र बनाए गए। जिसका सीधा फायदा BJP को राजनीतिक तौर पर मिला। असम में 2023 के डिलिमिटेशन के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP को महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल इन तीन राज्यों में झटका लगा। कहा जा रहा है कि BJP अब इन राज्यों पर फोकस कर रही है।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल इन तीन राज्यों पर खास फोकस क्यों?
इन तीनों राज्यों में कुल 170 लोकसभा सीटें हैं। 2024 में NDA को इन राज्यों में सिर्फ 65 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। वहीं विपक्षी पार्टी इंडिया अलायंस को 105 सीटें मिलीं। आज विपक्षी पार्टियों की जो ताकत है, वह उन्हें इन्हीं राज्यों से मिली है। इसलिए राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भविष्य में चुनाव क्षेत्र के पुनर्गठन या राजनीतिक फेरबदल का सबसे बड़ा असर इन राज्यों में देखने को मिल सकता है। ..अभी भी 40 MP कम
BJP बिहार, झारखंड, हरियाणा और राजस्थान की 23 लोकसभा सीटों पर भी फोकस कर रही है। BJP पिछली बार ये सीटें नहीं जीत पाई थी। BJP की स्ट्रैटेजी को लागू करने के लिए उन्हें दो-तिहाई बहुमत चाहिए। संवैधानिक बदलावों के लिए 360 MPs का सपोर्ट चाहिए। राज्यसभा में यह संख्या 163 है। अभी, NDA के लोकसभा में 293 MPs हैं। अगर तृणमूल कांग्रेस के 20 MPs और ठाकरे ग्रुप के 6 MPs आ जाएं तो यह संख्या 320 के करीब पहुंच जाती है। हालांकि, BJP अभी भी दो-तिहाई बहुमत से 40 MP कम है।
क्या महाराष्ट्र से पश्चिम बंगाल तक फैल रही राजनीतिक अशांति उसी स्ट्रैटेजी का हिस्सा है?
BJP इन सभी संभावनाओं को खारिज कर रही है और कह रही है कि यह विपक्षी पार्टियों का अंदरूनी मामला है। मौजूदा घटनाक्रम को देखें तो इसके पीछे मकसद सिर्फ संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि 2029 की तैयारी, नया डिलिमिटेशन, महिला रिजर्वेशन और एक नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत करना है। क्या यह सब किसी बड़े संवैधानिक बदलाव के लिए है? क्या महाराष्ट्र से पश्चिम बंगाल तक फैल रही राजनीतिक अशांति उसी रणनीति का हिस्सा है? उम्मीद है कि इन सवालों के जवाब जल्द ही मिल जाएंगे।





