Budh Pradosh Vrat Puja: शाम को भोलेनाथ की पूजा के समय रखें विशेष रूप से इन बातों का ध्यान, नहीं तो रह जाएगी...
- byShiv
- 15 Apr, 2026
इंटरनेट डेस्क। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है, खासकर जब यह बुधवार के दिन पड़ता है तो इसे बुध प्रदोष कहा जाता है। साल 2026 में वैशाख माह का पहला बुध प्रदोष व्रत 15 अप्रैल को रखा जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने पर सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। हालांकि, प्रदोष व्रत की पूजा के कुछ कड़े नियम हैं, खासकर शाम की पूजा के। आइए जानते हैं शाम की पूजा में किन गलतियों से बचना जरूरी है।
प्रदोष काल में पूजा का महत्व
जानकारी के अनुसार प्रदोष काल में जब भगवान शिव बहुत प्रसन्न अवस्था में होते हैं। इस समय उनकी आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
रखें शाम को इन बातों का ध्यान
शुद्धता का ध्यान
शाम की पूजा से पहले स्नान करना और साफ कपड़े पहनना बेहद जरूरी है। बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में पूजा करने से व्रत का फल अधूरा रह सकता है।
समय का ध्यान रखना
प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण नियम है सही समय यानी प्रदोष काल में पूजा करना। अगर पूजा इस समय के बाहर की जाती है, तो उसका प्रभाव कम हो जाता है।
सामग्री का ध्यान
भगवान शिव की पूजा में कुछ चीजें वर्जित मानी जाती हैं, जैसे केतकी का फूल, इसके अलावा बासी या अशुद्ध सामग्री अर्पित करने से भी पूजा का फल नहीं मिलता।
pc- ndtv.in





