गहलोत ने जाति जनगणना प्रक्रिया को बताया ‘त्रुटिपूर्ण’, केंद्र के तरीके पर उठाए सवाल

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राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को केंद्र की चल रही जाति जनगणना प्रक्रिया को “पूरी तरह से गलत” बताया और आरोप लगाया कि इस तरीके से जाति के हिसाब से डेटा इकट्ठा करने का मकसद ही खत्म हो सकता है। गहलोत ने जाति की पहचान दर्ज करने के लिए ओपन-एंडेड सवालों के इस्तेमाल पर सवाल उठाया, और तर्क दिया कि एक ही जाति को देश भर में अलग-अलग नामों, उप-जातियों और क्षेत्रीय बदलावों से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इससे एक जाति कई नामों से दर्ज हो सकती है, जिससे डेटा को एक साथ लाना और सही तस्वीर तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।

उन्होंने इस काम से “अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)” के न होने पर भी सवाल उठाया, और कहा कि इससे पिछड़े वर्गों की असली आबादी का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। गहलोत ने आरोप लगाया कि तरीके को लेकर कन्फ्यूजन अचानक नहीं था और यह जाति के हिसाब से सही आंकड़े सामने आने से रोकने की एक सोची-समझी रणनीति लगती है।

पूर्व CM की यह टिप्पणी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने के बाद आई, जिसमें उन्होंने सवालों के जवाब में बदलाव करने और इस काम के लिए जातियों की पहले से तय लिस्ट बनाने की मांग की थी। कांग्रेस नेताओं ने 2022 के बिहार जाति सर्वे और 2024 के तेलंगाना जाति सर्वे का उदाहरण दिया, जहाँ जाति लिस्ट पहले से तैयार की गई थी, जिन्हें फॉलो किया जा सकता है।

गहलोत ने कहा कि केंद्र को मौजूदा तरीका वापस लेना चाहिए और नया क्वेश्चनेयर तैयार करने से पहले राजनीतिक पार्टियों, एक्सपर्ट्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स से सलाह लेनी चाहिए।