वट पूर्णिमा का व्रत 29 जून को है या 30 जून को? बस एक क्लिक से दूर करें अपना कन्फ्यूजन

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ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला वट पूर्णिमा हिंदू धर्म में शादीशुदा महिलाओं के लिए बहुत खास और पवित्र माना जाता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी सावित्री ने अपने पक्के इरादे से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांगे थे। इसलिए, इस कहानी के अनुसार, यह व्रत पूरे महाराष्ट्र में बहुत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस साल, कई महिलाएं वट पूर्णिमा की तारीख को लेकर कंफ्यूज हैं कि यह व्रत 29 जून को रखा जाए या 30 जून को। आइए पंचांग के अनुसार इस कंफ्यूजन को दूर करते हैं और इस व्रत की तारीख, महत्व और बहुत ही आसान पूजा विधि जानते हैं।

2026 में वट पूर्णिमा व्रत कब है?

दृक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा 29 जून, 2026 को सुबह 3:06 बजे शुरू होगी। यह पूर्णिमा 30 जून, 2026 को सुबह 5:26 बजे खत्म होगी। क्योंकि पूर्णिमा 29 जून को सूर्योदय के समय है, इसलिए 2026 में वट पूर्णिमा का व्रत सोमवार, 29 जून को रखा जाएगा।

बरगद के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है?

हिंदू धर्म में बरगद के पेड़ को अमरता और लंबी उम्र का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि बरगद के पेड़ की पूजा करने से पति-पत्नी के बीच का रिश्ता मजबूत होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इसके अलावा, यह व्रत महिलाओं को धैर्य, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ता है।

वट पूर्णिमा व्रत करने की आसान विधि

वट पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। चावल, फूल, जल, धूप, दीपक, झांझ, फल और मिठाई जैसी पूजा सामग्री तैयार करें। फिर बरगद के पेड़ के पास जाएं और पेड़ को जल चढ़ाएं। पूजा सामग्री बरगद के पेड़ के नीचे चढ़ाएं और दीपक जलाएं। फिर पेड़ के चारों ओर धागा या कपड़े का टुकड़ा लपेटकर उसकी परिक्रमा करें। इसके बाद सावित्री और सत्यवान की कहानी सुनें या सुनाएं और अपने पति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। आखिर में आरती करके पूजा खत्म करें।

वट पूर्णिमा के व्रत का धार्मिक महत्व

वट पूर्णिमा का व्रत सावित्री और सत्यवान की कहानी से जुड़ा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावित्री ने अपनी भक्ति, तपस्या और पक्के इरादे से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। तब से यह व्रत अपने पति की लंबी उम्र और शादीशुदा ज़िंदगी की खुशी के लिए किया जाता है। इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा करना खास तौर पर ज़रूरी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवता निवास करते हैं। इसकी पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और शादीशुदा ज़िंदगी खुशहाल रहती है।