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दिवाली बोनस त्योहार की खुशी बढ़ा सकते हैं, लेकिन कर्मचारियों को यह याद रखना चाहिए कि एक्स्ट्रा पेमेंट से उनकी टैक्स देनदारी भी बढ़ सकती है। चाहे एम्प्लॉयर बोनस सीधे कर्मचारी के बैंक अकाउंट में क्रेडिट करे या गिफ्ट वाउचर के तौर पर दे, टैक्स का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस रूप में मिला है।
कैश में दिया गया दिवाली बोनस सैलरी इनकम माना जाता है और इनकम-टैक्स एक्ट के तहत पूरी तरह टैक्सेबल है। त्योहारों के बोनस के लिए कोई अलग टैक्स छूट नहीं है, और यह रकम कर्मचारी की सालाना सैलरी में जोड़ी जाती है और लागू इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगती है।
क्लियरटैक्स की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन ने कहा, "दिवाली बोनस को इनकम-टैक्स एक्ट के तहत सैलरी से इनकम माना जाता है और यह उस फाइनेंशियल ईयर में पूरी तरह टैक्सेबल है जिसमें कर्मचारी ने इसे घोषित किया है या पाया है, जो भी लागू हो। दिवाली बोनस के लिए ऐसी कोई खास छूट नहीं है।"
पुराने और नए टैक्स सिस्टम के तहत दिवाली बोनस पर टैक्स कैसे लगता है?
दिवाली बोनस पर अलग से टैक्स रेट नहीं लगता है। इसे कर्मचारी की ग्रॉस सालाना सैलरी में जोड़ा जाता है, और फ़ाइनल टैक्स लायबिलिटी कर्मचारी के चुने हुए टैक्स सिस्टम के तहत कैलकुलेट की जाती है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई कर्मचारी सालाना 12 लाख रुपये कमाता है और उसे 2 लाख रुपये का दिवाली बोनस मिलता है, तो उसकी ग्रॉस सैलरी बढ़कर 14 लाख रुपये हो जाती है। नए टैक्स सिस्टम के तहत, कर्मचारी 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन क्लेम कर सकता है, जबकि पुराने सिस्टम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये है। सेक्शन 80C और सेक्शन 80D के तहत एलिजिबल डिडक्शन, पुराने सिस्टम के तहत टैक्सेबल इनकम को और कम कर सकते हैं।
वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन ने कहा कि बोनस के लिए कोई स्टैंडअलोन टैक्स रेट नहीं है। एडिशनल पेमेंट पर कर्मचारी के लागू मार्जिनल स्लैब रेट के साथ-साथ 4 परसेंट हेल्थ और एजुकेशन सेस के हिसाब से टैक्स लगता है।
क्या दिवाली बोनस से आपका मंथली TDS बढ़ेगा?
बोनस मिलने से कर्मचारी की सालाना टैक्स लायबिलिटी बढ़ सकती है और नतीजतन, उनकी सैलरी से सोर्स पर टैक्स डिडक्टेड (TDS) भी बढ़ सकता है।
एम्प्लॉयर अनुमानित सालाना इनकम के आधार पर TDS कैलकुलेट करते हैं। जब दिवाली बोनस दिया जाता है, तो वे इसे अनुमानित सालाना सैलरी में जोड़ते हैं और बाकी TDS कटौती को उसी हिसाब से एडजस्ट करते हैं। एक्स्ट्रा टैक्स बोनस से पहले ही काटा जा सकता है या मार्च तक बाकी सैलरी पेमेंट में बांटा जा सकता है।
बोनस किसी कर्मचारी को ऊंचे टैक्स स्लैब में भी डाल सकता है। हालांकि, सिर्फ़ ऊंचे स्लैब में आने वाली इनकम पर ही उस रेट से टैक्स लगता है, पूरी सैलरी पर नहीं।
जैन के मुताबिक, नए टैक्स सिस्टम के तहत कर्मचारियों को अपनी सेक्शन 87A रिबेट एलिजिबिलिटी पर पड़ने वाले असर पर भी विचार करना चाहिए। अगर उनकी टैक्सेबल इनकम लागू रिबेट लिमिट को पार कर जाती है, तो वे थोड़ी राहत के साथ पूरी रिबेट खो सकते हैं।
क्या दिवाली गिफ्ट वाउचर और गिफ्ट इन काइंड टैक्स-फ्री हैं?
जब दिवाली बोनस कैश के बजाय गिफ्ट वाउचर, गिफ्ट कार्ड या इन काइंड के रूप में दिया जाता है तो टैक्स ट्रीटमेंट बदल जाता है। नॉन-कैश गिफ्ट, जैसे फेस्टिव हैंपर्स, सोने या चांदी के सिक्के, और गिफ्ट वाउचर, इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 17 के तहत परक्विजिट माने जाते हैं। इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 के रूल 15 के तहत, एम्प्लॉयर से मिले गिफ्ट, वाउचर और टोकन की टैक्सेबल वैल्यू ज़ीरो मानी जाती है, अगर उनकी कुल वैल्यू टैक्स ईयर के दौरान 15,000 रुपये से कम रहती है, जो पहले 5,000 रुपये की लिमिट थी। अगर कुल वैल्यू 15,000 रुपये तक या उससे ज़्यादा हो जाती है, तो पूरी रकम परक्विजिट के तौर पर टैक्सेबल हो जाती है। कैश में गिफ्ट या जिन्हें पैसे में बदला जा सकता है, जैसे गिफ्ट चेक, पूरी तरह से टैक्सेबल हैं।





