Fatty liver in women: 3 में से एक कामकाजी महिला को फैटी लिवर का खतरा; शराब पिए बिना लिवर में फैट क्यों जमा होता है? जानें कारण
- byvarsha
- 13 Aug, 2026
pc: Pall Mall
जब फैटी लिवर की बात आती है, तो कई लोगों के दिमाग में शराब पीने की आदत आती है। हालांकि, फैटी लिवर की समस्या उन महिलाओं में भी बढ़ रही है जो शराब नहीं पीती हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, भारत में हर तीन में से एक कामकाजी महिला को फैटी लिवर का खतरा हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि कई महिलाओं को इसके बारे में पता भी नहीं होता क्योंकि शुरुआत में इस बीमारी के कोई साफ लक्षण नहीं दिखते।
दिन में 8 से 9 घंटे ऑफिस में बैठे रहना, समय पर खाना न खाना और जल्दबाजी में कुछ भी खा लेना लिवर की सेहत पर असर डाल सकता है। शरीर की मूवमेंट कम होने से फैट बर्न होने का प्रोसेस धीमा हो जाता है। इसमें, दिन भर चाय, कॉफी और बिस्कुट खाना, रात में खाना छोड़कर भारी खाना खाना और बार-बार डिलीवरी वाला खाना खाना शामिल है, जिससे शरीर में ज्यादा शुगर और फैट जमा होने की संभावना बढ़ जाती है।
फैटी लिवर में शरीर में असल में क्या होता है?
यह समस्या लिवर में ज्यादा फैट जमा होने से शुरू होती है। इसके स्टेज आमतौर पर इस तरह होते हैं-
स्टेज 1- फैटी लिवर: लिवर में फैट जमा हो जाता है। इस स्टेज में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखते।
स्टेज 2- सूजन: लिवर में सूजन या सूजन होने लगती है।
स्टेज 3- निशान: लिवर सेल्स पर निशान जैसे बदलाव होने लगते हैं।
स्टेज 4- परमानेंट डैमेज: लिवर को गंभीर और परमानेंट डैमेज होने का खतरा होता है।
बहुत से लोगों को फैटी लिवर की समस्या स्टेज 3 तक पहुंचने के बाद ही पता चलती है। इसलिए, यह ज़रूरी है कि शुरुआती स्टेज में भी शरीर जो सिग्नल दे रहा है, उन्हें नज़रअंदाज़ न करें।
5 संकेत जो बताते हैं लिवर स्ट्रेस में है
पूरी नींद लेने के बावजूद लगातार थकान महसूस होना
फैट फैट कम न होना
खाने के बाद बार-बार ब्लोटिंग
स्किन डल दिखना या आंखों के नीचे डार्क सर्कल
ब्लड टेस्ट में ALT या AST बढ़ा हुआ दिखना
ये लक्षण ज़रूरी नहीं कि सिर्फ़ फैटी लिवर की वजह से हों। हालांकि, अगर आपको ऐसे लक्षण महसूस हो रहे हैं या आपके ब्लड टेस्ट में ALT/AST बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।
फैटी लिवर कम करने के लिए आप क्या कर सकते हैं?
अगर फैटी लिवर का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए, तो लाइफस्टाइल में सही बदलाव करके इसके ठीक होने की संभावना है। इसके लिए डाइट और एक्सरसाइज पर ध्यान देना ज़रूरी है।
हर मील के साथ लगभग 20 ग्राम प्रोटीन लेने की कोशिश करें।
अपनी डेली डाइट में फाइबर और हरी सब्जियां शामिल करें।
हर मील के बाद थोड़ा वॉक करने की आदत डालें।
हफ्ते में एक बार रेगुलर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें।
चीनी और प्रोसेस्ड फूड कम करें।
बार-बार मील स्किप करने और फिर एक बार में बहुत भारी खाना खाने से बचें।






