Holi 2026: जाने कितनी बार करनी चाहिए अग्नि की परिक्रमा, इसके पीछे क्या हैं कारण

इंटरनेट डेस्क। हिंदू धर्म में होली का पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। होलिका दहन की अग्नि को बहुत ही पवित्र और ऊर्जा से भरपूर माना गया है, जिसमें हमारे जीवन की नकारात्मकता को दूर करने की शक्ति होती है। बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि होली अग्नि की परिक्रमा करना केवल एक धार्मिक रीत नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के प्रति अपना आभार जताने और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने का एक तरीका भी है।

परिक्रमा की सही संख्या क्या हैं
होलिका दहन के समय परिक्रमा की संख्या का बहुत महत्व होता है। आमतौर पर शास्त्रों के अनुसार अग्नि की तीन या सात बार परिक्रमा करना सबसे शुभ माना जाता है। तीन की संख्या को त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सम्मान में उत्तम माना जाता है, जबकि सात परिक्रमाएं हमारे जीवन के सात चक्रों की शुद्धि का संकेत देती हैं। परिक्रमा करते समय मन में ईश्वर के प्रति धन्यवाद का भाव रखना चाहिए, जिससे हम उन सभी सुखों के लिए आभार व्यक्त कर सकें जो हमें मिले हैं।

ये भी हैं कारण
अग्नि की परिक्रमा करने के पीछे केवल श्रद्धा ही नहीं, बल्कि कुछ वैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं। होलिका दहन के समय जब अग्नि तेज जलती है, तो उसके आसपास का तापमान बढ़ जाता है जो वातावरण में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है। जब हम परिक्रमा करते हैं, तो अग्नि की वह ऊर्जा हमारे शरीर को छूती है जिससे सेहत में सुधार होने की संभावना बनी रहती है।

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