महाकुंभ 2025: 651 किलोमीटर लंबी लोहे की सड़क से रेती पर आसान होगा आवागमन
- byTrainee
- 30 Dec, 2024
प्रयागराज: प्रयागराज संगम विश्व की एकमात्र ऐसी जगह है जहां मात्र तीन महीने के लिए हजारों करोड़ रुपये के बजट से एक अस्थाई शहर बसाया जाता है। यहां करोड़ों श्रद्धालु आकर इस अनोखे अनुभव का हिस्सा बनते हैं। महाकुंभ 2025 में यह क्षेत्रफल 4000 हेक्टेयर में फैला होगा और इसे 26 सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा।
श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए मेला क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा चक्कर प्लेट बिछाई जा रही है। यह अस्थाई सड़क आवागमन को सुचारू बनाती है, खासतौर से रेतीले इलाकों में।
लोहे की सड़क की विशेषताएं:
महाकुंभ में बिछाई जाने वाली लोहे की सड़क की कुल लंबाई 651 किलोमीटर होगी। मेला अधिकारी विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि चक्कर प्लेट का काम सबसे पहले किया जाता है ताकि अन्य कार्य बिना किसी बाधा के पूरे हो सकें। यह सड़क वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाती है और मेले के भीतर सभी क्षेत्रों को जोड़ती है।
दुनिया की सबसे लंबी लोहे की सड़क:
महाकुंभ में बनने वाली यह लोहे की सड़क विश्व में सबसे लंबी हो सकती है। इसे गंगा-यमुना की रेती पर बिछाया जाता है और इसके ऊपर से दोपहिया, चारपहिया और भारी वाहन गुजरते हैं। यह चक्कर प्लेट पीपा पुल को भी जोड़ती है, जिससे दोनों किनारों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होती है।
कैसे होता है निर्माण?
चक्कर प्लेट निर्माण का कार्य लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा किया जाता है। इस वर्ष 488 किलोमीटर मुख्य मार्ग के साथ-साथ विभिन्न आश्रमों और संस्थानों तक सड़क बिछाने का कार्य किया जाएगा। यह सुनिश्चित करता है कि मेले में किसी को भी आवागमन में परेशानी न हो।
PC - DHAINIK JAGRAN






