Personal Loan Eligibility: सिर्फ सैलरी नहीं, ये फैक्टर तय करते हैं बैंक का फैसला
- byrajasthandesk
- 25 Jan, 2026
जब अचानक कोई बड़ा खर्च सामने आ जाता है—जैसे मेडिकल इमरजेंसी, मोबाइल खराब हो जाना या घर की जरूरी जरूरतें—तो पर्सनल लोन सबसे आसान विकल्प लगता है। ऐसे समय में सबसे पहला सवाल यही होता है: “पर्सनल लोन के लिए न्यूनतम सैलरी कितनी होनी चाहिए?”
अक्सर जवाब मिलता है ₹15,000, ₹20,000 या ₹25,000 प्रति माह। लेकिन यह केवल शुरुआती शर्त है। असली फैसला कई और बातों पर निर्भर करता है।
न्यूनतम सैलरी सिर्फ पहला कदम है
बैंक और वित्तीय संस्थान एक बेसिक इनकम तय करते हैं। मेट्रो शहरों में नौकरीपेशा लोगों के लिए यह आमतौर पर ₹20,000 से ₹25,000 होती है। छोटे शहरों में यह सीमा कम हो सकती है।
स्वरोजगार करने वालों से अक्सर ₹30,000 या उससे अधिक की आमदनी मांगी जाती है।
लेकिन इस स्तर तक पहुंचना सिर्फ यह साबित करता है कि आपका आवेदन जांच के लायक है। इसके बाद असली मूल्यांकन शुरू होता है।
सैलरी के बाद आपकी जेब में कितना बचता है?
बैंक यह देखता है कि आपकी आय में से कितनी रकम पहले से EMI में जा रही है—जैसे होम लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड और BNPL भुगतान।
अगर आपकी कमाई का बड़ा हिस्सा पहले ही किश्तों में चला जाता है, तो बैंक को जोखिम नजर आता है। यही वजह है कि समान सैलरी वाले दो लोगों को अलग-अलग निर्णय मिलता है।
नौकरी की स्थिरता सबसे अहम
बैंक को ज्यादा सैलरी से ज्यादा भरोसेमंद सैलरी पसंद होती है।
जो व्यक्ति दो साल से एक ही कंपनी में ₹30,000 कमा रहा है, उसे बैंक उस व्यक्ति से ज्यादा सुरक्षित मानता है जो ₹50,000 कमाता है लेकिन बार-बार नौकरी बदलता है।
स्थिरता बैंक के लिए जोखिम कम करती है।
स्वरोजगार वालों के लिए नियम ज्यादा सख्त
बैंक स्वरोजगार करने वालों की पिछले 2–3 साल की औसत आय देखता है।
अगर इनकम में उतार-चढ़ाव है या टैक्स में बहुत कटौती दिखाई गई है, तो बैंक मान लेता है कि भविष्य में भी अनिश्चितता रहेगी।
इस कारण सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों के लिए लोन पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
क्रेडिट हिस्ट्री सबसे बड़ा फैक्टर
पुरानी EMI मिस होना, देर से भुगतान, क्रेडिट कार्ड की पूरी लिमिट इस्तेमाल करना या लोन सेटल करना—ये सभी नेगेटिव संकेत माने जाते हैं।
₹35,000 कमाने वाला लेकिन साफ रिकॉर्ड रखने वाला व्यक्ति बैंक को ₹80,000 कमाने वाले लेकिन खराब क्रेडिट हिस्ट्री वाले व्यक्ति से ज्यादा सुरक्षित लगता है।
उम्र और शहर भी असर डालते हैं
अगर आप रिटायरमेंट के करीब हैं, तो बैंक लोन की अवधि कम कर सकता है। इससे EMI बढ़ जाती है और पात्रता घट सकती है।
इसके अलावा, मेट्रो शहर और छोटे शहर में एक ही सैलरी का मूल्य अलग-अलग माना जाता है क्योंकि खर्च का स्तर अलग होता है।
अगर आप सीमा पर हैं तो ये उपाय करें
लोन के लिए आवेदन से पहले आप:
- क्रेडिट कार्ड का बकाया चुका दें
- छोटी EMI बंद करें
- कम राशि के लिए आवेदन करें
- जरूरत पड़े तो को-एप्लिकेंट जोड़ें
NBFC से लोन जल्दी मिल सकता है, लेकिन ब्याज दर ज्यादा हो सकती है।
असली न्यूनतम इनकम क्या है?
बैंक की तय न्यूनतम सैलरी को एक पल के लिए भूल जाएं। अपनी संभावित EMI निकालें और खुद से पूछें—क्या मैं इसे हर महीने बिना तनाव चुका सकता हूं?
अगर जवाब “नहीं” है, तो बैंक भी आखिरकार वही नतीजा निकालेगा।
यही पर्सनल लोन की असली पात्रता और असली न्यूनतम इनकम है।



