Pitru Paksha: श्राद्ध-तर्पण करते समय स्टील और लोहे के बर्तनों से क्यों बचना चाहिए? जान लें कारण
- byvarsha
- 28 Sep, 2026
PC: navarashtra
पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, आभार और नमन व्यक्त करने का अवसर होता है। इस वर्ष तर्पण और श्राद्ध27 सितंबर से प्रारंभ होकर 10 अक्टूबर (अमावस्या) तक चेलंगे। इन 16 दिनों में पितरों को जल अर्पित करने और दान-पुण्य करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। वहीं पितृ हम पर अपनी कृपा दृष्टि भी बरसाते हैं।
तर्पण और पूजन के लिए शुभ धातुएं
शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार, श्राद्ध कर्म और तर्पण के लिए चांदी के बर्तनों को सर्वोच्च और सबसे पवित्र माना गया है, क्योंकि इसका संबंध चंद्रमा से है। यदि चांदी उपलब्ध न हो, तो पीतल, तांबा या कांसा के बर्तन इस्तेमाल किए जा सकते हैं। तांबा सूर्य-मंगल से, पीतल बृहस्पति से और कांसा बुध-शुक्र ग्रह से जुड़ा है।
इन बर्तनों के प्रयोग से बचें
पितृ पक्ष के दौरान लोहे, स्टील, कांच और प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग पूरी तरह वर्जित है। इन्हें नकारात्मक ऊर्जा और अशुद्धता का प्रतीक माना जाता है।
ज़रूरी नियम और सावधानियां
श्राद्ध कर्म में केवल गाय का दूध, दही और घी ही प्रयोग में लाएं।
पूजन सामग्री या बर्तनों को सीधे जमीन पर न रखें; इसके लिए कुशा के आसन, लकड़ी की चौकी या ऊनी/रेशमी कपड़े का प्रयोग करें।
तर्पण की सही विधि
सुबह स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। तांबे या चांदी के बर्तन में स्वच्छ जल भरकर उसमें काले तिल मिलाएं। अपने पितरों के नाम और गोत्र का स्मरण करते हुए अंजलि (हथेलियों) के माध्यम से जल अर्पित करें। तर्पण के पश्चात अपनी सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों, गायों और ज़रूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्न दान करें।






