Manisha Bhanwala: कौन हैं मनीषा भानवाला? जिन्होंने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर भारत का नाम किया रोशन

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मनीषा भानवाला ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतकर भारतीय रेसलिंग जगत में गर्व का योगदान दिया है। मनीषा ने महिलाओं की 59 kg वेट कैटेगरी के फाइनल में यूनाइटेड स्टेट्स की एबिगेल नेट को 8-6 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। इस जीत के साथ, वह वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला रेसलर बन गई हैं। उनकी इस सफलता से भारतीय रेसलिंग जगत में खुशी का माहौल है।

हरियाणा के एक किसान परिवार से ग्लोबल लेवल पर छलांग
मनीषा भानवाला हरियाणा के जींद की रहने वाली हैं और उनका परिवार खेती-बाड़ी के बिजनेस से जुड़ा है। उनके परिवार में स्पोर्ट्स का ट्रेडिशन रहा है। उनके भाई रिंकू कबड्डी प्लेयर हैं, जबकि उनकी भाभी ममता सिहाग भी रेसलर हैं। परिवार में स्पोर्ट्स का माहौल और गांव में स्पोर्ट्स कल्चर ने मनीषा को रेसलिंग करने के लिए इंस्पायर किया।

अपने रेसलिंग करियर के दौरान, उन्होंने अलग-अलग वेट ग्रुप में हिस्सा लिया। उन्होंने 62 kg, 65 kg और 57 kg जैसे अलग-अलग ग्रुप में मुकाबला किया। हालांकि, 29 साल की उम्र में उन्होंने 59 kg की नॉन-ओलंपिक वेट कैटेगरी में वर्ल्ड लेवल पर सबसे बड़ी कामयाबी हासिल की।

पिता की मौत के बाद भी जारी रखा संघर्ष
मनीषा भानवाला की ज़िंदगी का सबसे मुश्किल दौर उनके पिता की मौत थी। 2022 में मंगोलिया में होने वाली एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप के लिए निकलने से एक रात पहले उनके पिता की मौत हो गई। उनके पिता सुरेश एक जागरण में गए थे। अगली सुबह, उन्हें नींद में हार्ट अटैक आया और वे गुज़र गए। इस घटना ने मनीषा को पूरी तरह से थका दिया था। वह घर से बाहर भी नहीं निकलना चाहती थीं। कुछ समय के लिए तो उन्होंने रेसलिंग छोड़ने के बारे में भी सोचा।

हालांकि, अपने पिता का सपना पूरा करने का पक्का इरादा करके उन्होंने फिर से रेसलिंग के मैदान में कदम रखा। मुश्किल हालात के बावजूद, उन्होंने प्रैक्टिस जारी रखी और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं।

पिता को समर्पित गोल्ड मेडल
वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के फाइनल मैच में, मनीषा ने यूनाइटेड स्टेट्स की एबिगेल नेट को 8-6 से हराया। इस जीत के साथ, वह वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। जीत के बाद, उन्होंने दर्शकों के सामने गर्व से अपने माता-पिता की तस्वीर वाली एक सफेद टी-शर्ट दिखाई। यह पल सिर्फ एक एथलीट की जीत नहीं थी, बल्कि एक बेटी का अपने पिता का सपना पूरा करने का इमोशनल सफर था।

मनीषा भानवाला की इस कामयाबी ने भारतीय रेसलिंग को एक नई पहचान दी है। उन्होंने अपने परफॉर्मेंस से दिखाया है कि संघर्ष, पक्के इरादे और कड़ी मेहनत से ग्लोबल लेवल पर सफलता पाई जा सकती है।