Kamika Ekadashi 2026: इन कारणों से नष्ट हो जाता हैं एकादशी पर किए गए व्रत का पुण्य, ध्यान रखें इन बातों का
- byShiv
- 07 Aug, 2026
इंटरनेट डेस्क। पुराणों और धर्मशास्त्रों में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। मन, वचन और कर्म की शुद्धि का व्रत माना गया है। सावन में कामिका एकादशी व्रत 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। पद्म पुराण, स्कंद पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और भविष्योत्तर पुराण में इस व्रत का विधान बताया गया है। कुछ गलत आदतें और आचरण व्रत के पुण्य को नष्ट कर सकते हैं, इन आदतों से आपक व्रत निष्फल हो सकता है तो जानते हैं इनके बारे में।
एकादशी पर इन आदतों से व्रत का फल नष्ट हो सकता है
क्रोध करना - स्कंद पुराण के अनुसार क्रोध मन की पवित्रता को नष्ट करता है। अगर व्रती व्रत के दौरान क्रोध, झगड़ा या कटु व्यवहार करता है तो व्रत का आध्यात्मिक फल कम हो जाता है।
झूठ बोलना - धर्मग्रंथों में सत्य को धर्म का आधार कहा गया है। एकादशी के दिन असत्य बोलना, छल-कपट करना या किसी को धोखा देना व्रत की शुद्धता के विपरीत माना गया है।
चुगली और निंदा करना - ब्रह्मवैवर्त पुराण में परनिंदा और अपशब्दों से बचने का निर्देश मिलता है। व्रत के दिन किसी की बुराई करना या अपमान करना पुण्य का क्षय करने वाला माना गया है।
भगवान विष्णु की पूजा न करना - केवल भूखे रहना ही एकादशी नहीं है, अगर व्रती भगवान विष्णु का स्मरण, पूजा, मंत्रजप या कथा श्रवण नहीं करता, तो व्रत अधूरा माना गया है।
pc- parbhat khabar





