8वें वेतन आयोग पर चर्चा तेज: क्या 3.25 फिटमेंट फैक्टर से न्यूनतम वेतन ₹58,500 तक पहुँच सकता है?

देशभर के सरकारी कर्मचारियों में वेतन संशोधन को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। नए वेतन आयोग से वेतन, पेंशन और भत्तों में बदलाव की उम्मीद की जा रही है, और सबसे ज्यादा ध्यान जिस पहलू पर है वह है फिटमेंट फैक्टर। यही वह गुणांक है जो मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई वेतन राशि तय करता है। प्रारंभिक चर्चाओं से संकेत मिल रहे हैं कि यदि उच्च प्रस्ताव मंजूर होते हैं तो वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।

फिटमेंट फैक्टर क्यों है सबसे अहम

वेतन संशोधन की प्रक्रिया में फिटमेंट फैक्टर को आधार माना जाता है। यह सीधे तौर पर सभी वेतन स्तरों को प्रभावित करता है—चाहे नया कर्मचारी हो या वरिष्ठ अधिकारी। पिछली वेतन समीक्षा में 2.57 का गुणांक अपनाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गई थी।

अब अगली सिफारिशों को लेकर चर्चा चल रही है और कर्मचारी संगठन यह जानने के इच्छुक हैं कि इस बार कितना गुणांक लागू किया जाएगा।

कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगें

कई कर्मचारी संघों ने 2.86 से 3.25 के बीच फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव रखा है। यदि उच्चतम सीमा स्वीकार की जाती है, तो अनुमान है कि न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹58,500 तक जा सकता है।

संगठनों का कहना है कि महंगाई और बढ़ती जीवन लागत के कारण मौजूदा वेतन संरचना वास्तविक जरूरतों के अनुरूप नहीं रही है। उनका तर्क है कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिरता और जीवन स्तर सुधारने के लिए अधिक गुणांक आवश्यक है।

महत्वपूर्ण बैठक जल्द

इस प्रक्रिया का अगला अहम चरण 25 फरवरी 2026 को होने वाली बैठक है, जो New Delhi में आयोजित होगी। यह बैठक Joint Consultative Machinery के तहत National Council (Staff Side) की ड्राफ्टिंग कमेटी द्वारा की जाएगी। इसमें कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगों को अंतिम रूप देकर एक संयुक्त ज्ञापन तैयार किया जाएगा।

यह दस्तावेज वेतन संशोधन के साथ सेवा शर्तों और अन्य सुविधाओं पर भी सुझाव देगा, जिसे आगे विचार के लिए आयोग को सौंपा जाएगा।

भत्ते और पेंशन पर भी फोकस

हालाँकि मुख्य चर्चा वेतन वृद्धि पर है, लेकिन अन्य मुद्दे भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। कर्मचारी संगठनों ने हर साल लगभग 5 प्रतिशत की निश्चित वेतन वृद्धि प्रणाली लागू करने की मांग रखी है ताकि आय में नियमित बढ़ोतरी सुनिश्चित हो सके।

मकान किराया भत्ता दरों की समीक्षा, महंगाई भत्ता गणना में संशोधन और पेंशन अपडेट के लिए एक पारदर्शी फार्मूला भी प्रमुख मांगों में शामिल हैं। पेंशनर्स चाहते हैं कि वेतन संशोधन के साथ उनकी पेंशन भी स्वतः समायोजित हो।

सरकार ने प्रक्रिया शुरू की

नए वेतन आयोग की स्थापना सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम मानी जा रही है। इसकी घोषणा जनवरी 2025 में की गई थी, जिससे संकेत मिला कि सरकार वेतन ढाँचे की व्यापक समीक्षा करना चाहती है।

इसके बाद उसी वर्ष Finance Ministry ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर आयोग की कार्य-सीमा तय की। आयोग को 18 महीने के भीतर वेतन, पेंशन और भत्तों पर अपनी सिफारिशें देने का निर्देश दिया गया है।

ऑनलाइन पोर्टल से मिलेगी भागीदारी

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक आधिकारिक डिजिटल पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहाँ कर्मचारी, पेंशनर्स और अन्य हितधारक सुझाव दे सकते हैं। इस पहल से जमीनी स्तर की समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।

आगे क्या होगा

पिछले वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है और अब नई सिफारिशों का इंतजार है। प्रस्तावित तारीख के अनुसार संशोधित वेतन 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है, लेकिन वास्तविक क्रियान्वयन रिपोर्ट जमा होने और सरकारी मंजूरी पर निर्भर करेगा।

बड़े वित्तीय प्रभाव को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि लागू करने की प्रक्रिया चरणबद्ध हो सकती है। फिलहाल कर्मचारी हर अपडेट पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि अंतिम फिटमेंट फैक्टर उनके भविष्य की आय पर गहरा असर डाल सकता है।