Basant Panchami 2026: 23 जनवरी को दिनभर कर सकते हैं मां सरस्वती की पूजा, दोपहर में 48 मिनट रहेंगे विशेष, इस समय की गई पूजा से मिलेगा....
- byShiv
- 20 Jan, 2026
इंटरनेट डेस्क। भारतीय सनातन परंपरा में बसंत पंचमी का विशेष स्थान है। इसी दिन मां सरस्वती, जो ब्रह्मा की शक्ति और समस्त विद्याओं की अधिष्ठात्री देवी है, उनकी विशेष पूजा की जाती है। सरस्वती पूजा हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी ही क्यों?
सरस्वती पूजा के इस तिथि के पीछे तीन प्रमुख शास्त्रीय कारण माने गए है। देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस इसी दिन माना जाता है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि माघशुक्लपंचम्यां तु प्रादुर्भूता सरस्वती। अर्थात् माघ शुक्ल पंचमी के दिन ही देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि को वाणी और ज्ञान प्रदान करने हेतु सरस्वती को प्रकट किया।
सरस्वती पूजा की विधि
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। श्वेत या पीले पुष्प अर्पित करें। पुस्तकें, वाद्य यंत्र, लेखनी आदि पूजा में रखें। मां सरस्वती के मंत्र का जप करें। भजन व आरती से मां सरस्वती की आराधना करें।
सरस्वती पूजा मुहूर्त
23 जनवरी 2026 को वैसे तो पूरा दिन भर पंचमी है। इस कारण कभी भी पूजन कर सकते है। परंतु इसी दिन पूर्वा 11.40 से 12.28 अभिजीत मुहूर्त है। इस दौरान सरस्वती पूजा करना विशेष शुभ और फलदाई है। हालांकि स्थान परिवर्तन होने पर यह समय कुछ आगे-पीछे हो सकता है।
pc- tv9






