हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो गया? नॉन-डिस्क्लोजर के बाद भी मिल सकता है राहत, जानिए अपील का पूरा प्रोसेस
- byrajasthandesk
- 08 Jan, 2026
हेल्थ इंश्योरेंस आज के समय में किसी भी परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल बन चुका है। अस्पताल का खर्च तेजी से बढ़ रहा है और गंभीर बीमारी या इमरजेंसी में यह पॉलिसी बड़ी राहत देती है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि जब इलाज के बाद क्लेम करने की बारी आती है, तो कंपनी उसे नॉन-डिस्क्लोजर यानी पॉलिसी लेते समय पूरी जानकारी न देने के आधार पर रिजेक्ट कर देती है। ऐसे में मरीज और परिवार दोनों मानसिक और आर्थिक तनाव में आ जाते हैं।
हालांकि, जरूरी बात यह है कि क्लेम रिजेक्ट होने के बाद भी रास्ते बंद नहीं होते। सही प्रक्रिया अपनाकर और जरूरी दस्तावेजों के साथ आप दोबारा अपील कर सकते हैं और कई मामलों में क्लेम मंजूर भी हो जाता है।
नॉन-डिस्क्लोजर क्या होता है और क्यों बनता है समस्या?
नॉन-डिस्क्लोजर का मतलब है पॉलिसी लेते समय अपनी किसी बीमारी, मेडिकल हिस्ट्री या हेल्थ से जुड़ी अहम जानकारी को छिपाना या अधूरा बताना। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉइड या हार्ट की समस्या है और उसने यह जानकारी फॉर्म में नहीं दी, तो इंश्योरेंस कंपनी इसे जोखिम छुपाना मानती है।
बाद में जब उसी बीमारी से जुड़ा इलाज होता है और क्लेम डाला जाता है, तो कंपनी यह कहकर क्लेम खारिज कर सकती है कि पॉलिसी लेते समय सही जानकारी नहीं दी गई थी।
क्या नॉन-डिस्क्लोजर के बाद भी क्लेम मिल सकता है?
जी हां, कई मामलों में अपील करने पर क्लेम दोबारा मंजूर किया गया है। हर नॉन-डिस्क्लोजर जानबूझकर नहीं होता। कई बार लोग अनजाने में या जानकारी की कमी के कारण छोटी बीमारियों को गंभीरता से नहीं लेते और फॉर्म में नहीं लिखते।
अगर आप साबित कर सकें कि:
- बीमारी का इलाज मौजूदा क्लेम से सीधे जुड़ा नहीं है
- या बीमारी बहुत पहले ठीक हो चुकी थी
- या डॉक्टर की रिपोर्ट में यह नहीं दिखता कि यह पहले से मौजूद थी
तो कंपनी को दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
क्लेम रिजेक्ट होने पर सबसे पहले क्या करें?
- लिखित में कारण मांगें – सबसे पहले इंश्योरेंस कंपनी से ईमेल या लेटर के जरिए क्लेम रिजेक्शन का कारण पूछें।
- पॉलिसी डॉक्यूमेंट ध्यान से पढ़ें – देखें कि शर्तों में क्या लिखा है और कंपनी किस आधार पर क्लेम खारिज कर रही है।
- मेडिकल रिकॉर्ड इकट्ठा करें – डॉक्टर की रिपोर्ट, डिस्चार्ज समरी, टेस्ट रिपोर्ट्स और प्रिस्क्रिप्शन संभालकर रखें।
कंपनी से अपील कैसे करें?
आप अपनी इंश्योरेंस कंपनी के कस्टमर केयर या ग्रिवांस सेल में लिखित अपील कर सकते हैं। इसमें यह साफ लिखें कि:
- आपने जानबूझकर कोई जानकारी नहीं छिपाई
- बीमारी का वर्तमान इलाज से सीधा संबंध नहीं है
- सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स अटैच करें
कई बार कंपनी इंटरनल रिव्यू के बाद क्लेम को अप्रूव कर देती है।
ओम्बड्समैन और IRDAI की मदद कैसे लें?
अगर कंपनी आपकी बात नहीं मानती, तो आप:
- इंश्योरेंस ओम्बड्समैन के पास शिकायत कर सकते हैं
- या IRDAI (बीमा नियामक संस्था) की वेबसाइट पर जाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं
यह संस्थाएं ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा करती हैं और निष्पक्ष जांच के बाद फैसला सुनाती हैं।
क्यों जरूरी है हार न मानना?
जब किसी परिवार को अस्पताल का बड़ा बिल चुकाना पड़ता है और ऊपर से क्लेम रिजेक्ट हो जाता है, तो यह सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक झटका भी होता है। ऐसे समय में अपील की प्रक्रिया उम्मीद की किरण बनती है। कई मामलों में लोगों को महीनों बाद सही मेहनत और दस्तावेजों के दम पर क्लेम मिल गया है।
भविष्य के लिए जरूरी सलाह
- पॉलिसी लेते समय हर बीमारी और मेडिकल हिस्ट्री ईमानदारी से बताएं
- कोई भी जानकारी छोटी न समझें
- फॉर्म भरते समय जल्दबाजी न करें
- डॉक्यूमेंट्स संभालकर रखें
विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी देना और अपने अधिकारों को जानना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। क्लेम रिजेक्ट होने पर चुप न बैठें, बल्कि अपील करें और अपने हक के लिए आवाज उठाएं।






