क्या कुंडली में पितृ दोष है? पितृ पक्ष में करें ये उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद
- byvarsha
- 03 Oct, 2026
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हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का खास महत्व है। यह समय अपने पितरों को याद करने, उनके प्रति आभार जताने और उनकी शांति के लिए कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान करने का माना जाता है। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ दान-पुण्य करने की परंपरा है। माना जाता है कि अगर कुंडली में पितृ दोष है, तो पितृ पक्ष के दौरान कुछ खास धार्मिक उपाय किए जाते हैं। यह भी माना जाता है कि इस दौरान अपने पितरों को याद करने और श्रद्धा के साथ अनुष्ठान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं कि पितृ दोष के लिए कौन से उपाय बताए गए हैं और उन्हें कैसे किया जाता है।
तर्पण के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुंह करें
पितृ पक्ष के दौरान पितरों को तर्पण करने की परंपरा है। इसके लिए दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठना होता है। तांबे के बर्तन में पानी लेकर उसमें काले तिल, जौ, फूल, शक्कर और चावल मिलाए जाते हैं। यह पानी श्रद्धा के साथ, पितरों को याद करते हुए चढ़ाया जाता है। हो सके तो गया या हरिद्वार जाकर तर्पण करना भी जरूरी है।
पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए
पितृ पक्ष में पितृ दोष के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करने का भी रिवाज है। खासकर अमावस्या और शनिवार को पीपल पर कच्चा दूध और काले तिल चढ़ाए जाते हैं। पितरों को याद किया जाता है और उनकी शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
गाय, कुत्ते और कौए को खाना खिलाएं
पितृ पक्ष में अपने खाने का कुछ हिस्सा गाय, कुत्ते और कौए के लिए अलग रखने का रिवाज है। अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों और ज़रूरतमंदों को खाना या ज़रूरी चीज़ें दान करना भी ज़रूरी है।
मंत्रों का जाप और गीता का पाठ
इस दौरान ‘ॐ पितृभ्य नमः’ मंत्र का जाप करने का रिवाज है। इसके साथ ही श्रीमद् भगवद गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने को भी महत्व दिया जाता है। पितरों को याद करके उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
पिंडदान का रिवाज
पिंडदान के लिए पके हुए चावल, तिल और दूध को मिलाकर पिंड बनाया जाता है। यह पिंड श्रद्धा से पितरों को दिया जाता है। फिर खाने का एक हिस्सा गाय, कुत्ते, कौए और देवताओं के लिए निकाला जाता है। ब्राह्मणों को सात्विक भोजन देकर दक्षिणा देने की भी परंपरा है। ये सभी रस्में धार्मिक मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार की जाती हैं।






