Bhagwan Shiv: जब विवाह में पूछ लिया गया भगवान शिव को पिता का नाम, तब सामने आया इस सृष्टि का सच
- byShiv
- 27 Jan, 2026
इंटरनेट डेस्क। हर किसी के पिता होता हैं, चाहे आप हो हम हो या फिर कोई और, ऐसे में लोगों के मन में भी यह सवाल आता हैं की भगवान शिव के पिता कौन हैं, भगवान राम के पिता दशरथ, भगवान कृष्ण के पिता वासुदेव और भगवान गणेश के पिता शिवजी, ये सब तो आम तौर पर लोग जानते हैं, लेकिन जब बात खुद भगवान शिव की आती है, तो यहीं पर सोच अटक जाती है। हाल ही में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक कथा के जरिए इस सवाल का बेहद सुंदर और सरल उत्तर दिया।
नर्मदा जी ने की थी तपस्या
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार, एक समय नर्मदा जी ने काशी जाकर कठिन तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा, नर्मदा जी ने जो वरदान मांगा, वह साधारण नहीं था, उन्होंने कहा कि कल्प दर कल्प वे बनी रहें, उनका कभी नाश न हो और सबसे खास बात यह कि भगवान शिव उनके पुत्र बनें। यह सुनकर भगवान शिव मुस्कुराए और बोले कि यह मांग बड़ी विचित्र है. इसके बाद उन्होंने नर्मदा जी को एक कथा सुनाई, जिसमें इस प्रश्न का उत्तर छिपा है कि आखिर शिव का पिता कौन है।
शिव-पार्वती विवाह
भगवान शिव ने बताया कि जब हिमाचल में उनका विवाह माता पार्वती से हो रहा था, तब ब्रह्मा जी उस विवाह के पुरोहित बने। विवाह के दौरान जब गोत्र और पिता के नाम का प्रश्न उठा, तो एक पल के लिए सब चुप हो गए, सोचने की बात यह थी कि जो खुद सृष्टि के मूल हैं, वे अपने पिता का नाम कैसे बताएं? जब ब्रह्मा जी ने पूछा कि आपके पिता कौन हैं, तो शिव ने उत्तर दिया कि ब्रह्मा, फिर ब्रह्मा के पिता का नाम पूछा गया तो शिव ने कहा विष्णु, जब विष्णु के पिता यानी परदादा का नाम पूछा गया, तो शिव ने शांत भाव से कहा “वह मैं ही हूं।
इस कथा का असली अर्थ क्या है
इस कहानी का मतलब यह नहीं है कि शिव किसी वंश परंपरा में बंधे हुए हैं, इसका असली भाव यह है कि शिव ही सृष्टि का मूल हैं। जो कुछ दिखाई देता है, जो कुछ अदृश्य है, सब शिव से ही निकला है और अंत में शिव में ही समा जाता है।
pc- herzindagi.com





