Manikarnika Ghat:जाने क्यों कभी नहीं बुझती हैं मणिकर्णिका घाट पर आग, क्या हैं इसके पीछे का कारण?
- byShiv
- 21 Jan, 2026
इंटरेनट डेस्क। धर्म और मोक्ष की नगरी काशी में वैसे तो 84 घाट हैं, लेकिन मणिकर्णिका घाट का अपना एक विशेष महत्व है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा श्मशान घाट माना जाता है। जो भी व्यक्ति काशी जाता हैं वो इस जगह को जरूर देखने जाता है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि यहां की आग कभी ठंडी नहीं पड़ती। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे का कारण क्या है?
जलती हैं अखंड ज्योति
मणिकर्णिका घाट के बारे में सबसे बड़ी धार्मिक मान्यता यह है कि यहां एक अक्षय दीप या अखंड ज्योति जलती रहती है। भक्तों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस पवित्र ज्योति को स्वयं भगवान शिव ने प्रज्वलित किया था। हैरानी की बात यह है कि घाट पर होने वाले हर दाह संस्कार के लिए अग्नि इसी पवित्र स्रोत से ली जाती है, चाहे दिन हो या रात, इसी अखंड ज्योति से मुखाग्नि दी जाती है।
माता पार्वती का श्राप
इस घाट का नाम मणिकर्णिका पड़ने के पीछे भी एक पौराणिक कथा है, कहा जाता है कि माता पार्वती यहां स्नान कर रही थीं, तभी उनके कान की बाली (मणि) यहां कुंड में गिर गई थी, काफी खोजने के बाद भी जब वह बाली नहीं मिली, तब एक कथा के अनुसार माता पार्वती ने यह श्राप दिया था कि इस घाट पर चिता की अग्नि कभी नहीं बुझेगी। तब से आज तक यहां शवों के आने और दाह संस्कार का सिलसिला कभी नहीं रुका।
pc- thestatesman.com






