न दिन, न रात! अब आपके स्मार्टफोन पर नहीं बजेगा इमरजेंसी अलार्म… सरकार ने क्यों लिया यह बड़ा फैसला?

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इमरजेंसी अलार्म सर्विस सस्पेंड: क्या आपको कुछ दिन पहले आपके फ़ोन पर बजा इमरजेंसी अलार्म याद है? इस अचानक अलार्म से हर जगह बहुत कंफ्यूजन हो गया था। इसे लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) ने सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस को कुछ समय के लिए सस्पेंड करने का फैसला किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला एहतियात के तौर पर लिया गया है और अगले आदेश तक सर्विस बंद रहेगी।

सरकार ने यह बड़ा फैसला क्यों लिया?

NDMA ने अभी तक कोई ठोस वजह नहीं बताई है कि इमरजेंसी अलार्म सर्विस अचानक क्यों बंद कर दी गई है। हालांकि, अथॉरिटी ने कहा है कि यह फैसला एहतियात के तौर पर लिया गया है। कहा जा रहा है कि संबंधित सरकारी एजेंसियां ​​मिलकर इस टेक्नोलॉजी की एफिशिएंसी और इसके काम करने के तरीके का रिव्यू कर रही हैं। इससे भविष्य में इसकी एक्यूरेसी और बढ़ सकती है। बताया गया है कि अगले आदेश तक नागरिकों के फ़ोन पर कोई इमरजेंसी अलार्म नहीं भेजा जाएगा।

इमरजेंसी अलर्ट
यह सर्विस ऑफिशियली मई 2026 में लॉन्च की गई थी। इस सर्विस की मदद से लोगों को मौसम से जुड़ी वॉर्निंग जैसे कि कुदरती आफतों और दूसरी इमरजेंसी सिचुएशन से जुड़े अलर्ट सीधे लोगों के मोबाइल फोन पर भेजे जाते थे। अलर्ट के बाद, फोन स्क्रीन पर एक खास मैसेज भी दिखाया जाता था और इस समय एक तेज़ वॉर्निंग साउंड भी सुनाई देता था, ताकि यूज़र्स अलर्ट हो सकें और अपनी सुरक्षा कर सकें।

सेल ब्रॉडकास्ट मैसेज सर्विस
सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस एक टेक्नोलॉजी है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से, एक खास एरिया में सभी मोबाइल यूज़र्स को एक ही समय में इमरजेंसी अलर्ट मैसेज भेजा जा सकता है। इस टेक्नोलॉजी का मकसद लोगों तक कम से कम समय में कोई खास जानकारी या अलर्ट पहुंचाना है, ताकि वे किसी खतरे से खुद को बचाने के लिए सही कदम उठा सकें। इस सिस्टम का इस्तेमाल हाल के महीनों में आए भयंकर तूफान, साइक्लोन, भारी बारिश और ओले गिरने जैसी मौसम से जुड़ी सिचुएशन में किया गया था।

इस सर्विस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अलर्ट आपके मोबाइल पर तब भी भेजा जाएगा, जब इंटरनेट न हो। इसके अलावा, सबसे खास बात यह है कि ब्रॉडकास्ट मैसेज तुरंत आपके मोबाइल पर भेजा जाता है। इसमें कोई देरी नहीं होती। इस मैसेज का अलर्ट अलार्म बहुत तेज़ बजता है, जिससे सबका ध्यान इस ओर जाता है। यह मैसेज सिर्फ़ उसी एरिया में भेजा जाता है जहाँ खतरे की संभावना होती है। इस टेक्नोलॉजी को C-DOT यानी सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलीमैटिक्स और मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स ने मिलकर डेवलप किया है।