Shiv Puja: शिवलिंग में इन खास जगहों के स्पर्श मात्र से दूर होने लगता हैं आपका मंगलदोष
- byShiv
- 05 Jan, 2026
इंटरनेट डेस्क। हिंदू धर्म में भगवान शिव को संकटमोचक और दोषों के नाशक के रूप मे जाना जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिव आराधना न केवल जीवन की परेशानियों को दूर करती है, बल्कि जन्म कुंडली में मौजूद बड़े-से-बड़े ग्रह दोषों को भी शांत कर देती है। विशेष रूप से मंगल दोष तो दूर होते ही है। शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग केवल भगवान शिव का प्रतीक नहीं है, बल्कि उसमें शिव परिवार का पूर्ण वास माना गया है। यही कारण है कि शिवलिंग के अलग-अलग भागों का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पूजा के समय शिवलिंग के तीन खास स्थानों को सही विधि से स्पर्श किया जाए, तो मंगल दोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।
जलाधारी का अगला भाग
शिवलिंग के जलाधारी का जो हिस्सा आगे की ओर होता है, उसे पहला स्पर्श स्थल माना गया है। यह भाग पैरों के समान दिखाई देता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस स्थान पर भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय का वास होता है। पूजा समाप्त होने के बाद इस स्थान को श्रद्धा से स्पर्श करना चाहिए और फिर अपने हाथों को पेट पर लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से संतान से जुड़े कष्ट दूर होते हैं।
जल प्रवाह का मध्य भाग
शिवलिंग का दूसरा महत्वपूर्ण स्थान वह होता है, जहां से जलधारा आगे की ओर प्रवाहित होती है। शिव पुराण के अनुसार, इस मध्य भाग में भगवान शिव की पुत्री अशोक सुंदरी का वास माना गया है। इस स्थान को सीधे हाथ से नहीं, बल्कि बेलपत्र के माध्यम से स्पर्श करना शुभ माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस स्थान का पूजन और स्पर्श करने से विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और मंगल दोष का प्रभाव कम होने लगता है।
पिछला गोल भाग
शिवलिंग के जलाधारी का पिछला गोल हिस्सा तीसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। इसे माता पार्वती का हस्त कमल कहा जाता है। यह स्थान स्वास्थ्य और मानसिक शांति से जुड़ा हुआ माना जाता है। पूजा के दौरान इस भाग को श्रद्धा से स्पर्श करने पर रोगों से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल दोष को विवाह और दांपत्य जीवन से जुड़ी समस्याओं का मुख्य कारण माना गया है। शिवलिंग के इन तीन स्थानों को विधिपूर्वक स्पर्श करना मंगल ग्रह की उग्रता को शांत करता है।
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