जल्द अनिवार्य हो सकती है सिल्वर हॉलमार्किंग, अब तक 23 लाख से ज्यादा चांदी के आइटम सर्टिफाइड

चांदी की ज्वेलरी और आर्टिकल्स खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक अहम बदलाव आने वाला है। चांदी की शुद्धता को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंता को दूर करने के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में सिल्वर हॉलमार्किंग को अनिवार्य किया जा सकता है

फिलहाल चांदी की हॉलमार्किंग स्वैच्छिक है, लेकिन इसके बावजूद इसमें तेज़ी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। 1 सितंबर से HUID सिस्टम के तहत चांदी की ज्वेलरी और आर्टिकल्स को हॉलमार्क किया जा रहा है, और अब तक देशभर में 23 लाख से ज्यादा चांदी के आइटम्स सर्टिफाइड हो चुके हैं।

उपभोक्ताओं के हित में है हॉलमार्किंग

6 जनवरी को BIS के 79वें स्थापना दिवस के मौके पर BIS के महानिदेशक संजय गर्ग ने कहा कि हॉलमार्किंग का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और भरोसेमंद उत्पाद उपलब्ध कराना है। हॉलमार्किंग से धातु की शुद्धता की गारंटी मिलती है और ग्राहक धोखाधड़ी से बच पाते हैं।

हॉलमार्क में चांदी की फाइनेस, BIS का लोगो, ज्वेलर की पहचान, और कई मामलों में HUID नंबर शामिल होता है। इससे ग्राहक खरीदारी से पहले ही असली और नकली चांदी में अंतर कर सकता है।

मिलावट और धोखाधड़ी पर लगेगी रोक

हॉलमार्क वाली चांदी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्राहक जितनी शुद्धता के लिए भुगतान करता है, उसे वही गुणवत्ता मिलती है। इससे मिलावट, कम शुद्धता और वजन में हेरफेर जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकता है।

संजय गर्ग के अनुसार, गुणवत्ता ही किसी देश की पहचान तय करती है, और BIS का प्रयास है कि बाजार में उपलब्ध हर उत्पाद विश्वसनीय मानकों पर खरा उतरे।

गोल्ड हॉलमार्किंग से मिली सफलता

सोने के मामले में हॉलमार्किंग पहले ही बड़े स्तर पर लागू हो चुकी है। BIS के आंकड़ों के अनुसार, देश के 373 जिलों में सोने की ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग अनिवार्य है। अब तक 58 करोड़ से ज्यादा सोने के आभूषण हॉलमार्क किए जा चुके हैं, और हर महीने करीब एक करोड़ से अधिक गहनों पर हॉलमार्क लगाया जा रहा है।

गोल्ड हॉलमार्किंग की इस सफलता को देखते हुए अब चांदी के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।

आगे क्या करें ग्राहक

हालांकि सिल्वर हॉलमार्किंग अभी अनिवार्य नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राहकों को अभी से हॉलमार्क वाली चांदी खरीदनी चाहिए। इससे न केवल शुद्धता की गारंटी मिलती है, बल्कि रीसेल वैल्यू भी बेहतर रहती है।

जैसे ही जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार होगा, चांदी की हॉलमार्किंग को भी अनिवार्य किए जाने की पूरी संभावना है, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा और मजबूत होगा।