Vastu Shastra: घर के द्वार पर लगा रहे हैं गणेश जी की मूर्ति तो इस बात का रखें खास ध्यान, नहीं तो हो जाएंगे...
- byShiv
- 10 Jan, 2026
इंटरनेट डेस्क। हिंदू धर्म में भगवान गणेश जी को प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के पहले भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए लोग अक्सर अपने घरों के मुख्य द्वार पर गणेश जी की मूर्ति लगाते हैं। लेकिन, वास्तु शास्त्र और पौराणिक कथाओं के अनुसार, मुख्य द्वार पर गणेश जी की मूर्ति लगाते समय एक विशेष सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है।
गणेश जी की पीठ का रखें ध्यान
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश के शरीर के अलग-अलग अंगों में अलग-अलग शक्तियों का वास होता है। गणेश जी के पेट में संपूर्ण ब्रह्मांड समाया हुआ है, उनके मस्तक पर ज्ञान है, लेकिन उनकी पीठ पर दरिद्रता (अलक्ष्मी) का वास माना गया है।
क्या हैं वास्तु के नियम
वास्तु शास्त्र कहता है कि गणेश जी की पीठ कभी भी घर के अंदर की तरफ नहीं होनी चाहिए। यदि आप मुख्य द्वार के ठीक बाहर गणेश जी की मूर्ति लगाते हैं, तो उनकी पीठ घर की ओर हो जाती है।
सही तरीका
अगर आप मुख्य द्वार पर गणेश जी की प्रतिमा लगाना चाहते हैं, तो वास्तु के अनुसार एक विशेष नियम का पालन करना चाहिए।
जुड़वां मूर्ति
अगर आपने द्वार के बाहर मूर्ति लगाई है, तो ठीक उसी स्थान पर द्वार के अंदर की तरफ भी गणेश जी की एक मूर्ति या चित्र लगाएं।
पीठ से पीठ मिलाना
अंदर और बाहर वाली मूर्तियों की पीठ आपस में मिली होनी चाहिए। इससे भगवान की पीठ घर के अंदर नहीं दिखेगी और घर में सुख-समृद्धि का प्रवाह बना रहेगा।
pc- sanmarg.in




