देवशयनी एकादशी के बाद 4 महीने तक शुभ और मांगलिक काम हो जाएंगे बंद, जानें फिर से कब होंगे शुरू?

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सनातन धर्म में इन चार महीनों को बहुत खास माना जाता है, इस दौरान दुनिया के पालनहार भगवान विष्णु दुनियावी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर योग निद्रा में चले जाते हैं। शास्त्रों में इन महीनों का ज़िक्र चातुर्मास के तौर पर किया गया है। इस समय को संयम और समर्पण, भक्ति और पूजा, आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक तरक्की का समय माना जाता है। इन चार महीनों में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है।

हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस साल देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी। इसी दिन से चातुर्मास शुरू हो जाता है और इसके साथ ही चार महीने तक शादी, सगाई, गृहप्रवेश, नामकरण संस्कार, मुंडन संस्कार और उपनयन संस्कार जैसे सभी शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। तो चलिए आज के इस आर्टिकल में जानते हैं कि चातुर्मास के बाद शुभ और मांगलिक काम कब से फिर से शुरू होंगे।

चातुर्मास के बाद शुभ काम कब से फिर से शुरू होंगे?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 12 जुलाई के बाद शादी, जन्माष्टमी या उपनयन संस्कार और बाकी सभी शुभ काम बंद हो जाएंगे। क्योंकि चातुर्मास शुरू होने के बाद कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी से शुभ काम फिर से शुरू होंगे। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योग निद्रा से जागेंगे और दुनिया में अपनी जिम्मेदारियां फिर से संभालेंगे।

चातुर्मास के बाद शादी और उपनयन संस्कार के लिए शुभ समय

जिन परिवारों में शादी की बात चल रही है, उन्हें चातुर्मास के बाद 22 नवंबर तक इंतजार करना होगा। चातुर्मास के बाद पहला विवाह मुहूर्त 22 नवंबर को है। विवाह के लिए शुभ तिथियां 22, 25, 26 और 30 नवंबर के साथ-साथ 4, 6, 9, 10, 11 और 14 दिसंबर हैं। चातुर्मास के बाद अगले साल फरवरी में उपनयन संस्कार के लिए शुभ तिथियां हैं। उपनयन के लिए शुभ समय अगले साल 9 फरवरी से शुरू हो रहा है। इसके लिए मार्च, अप्रैल, मई से जुलाई महीने में शुभ तिथियां रहेंगी।