पहले भारत आकर देखो! ईरानी दूतावास ने ट्रंप के भारत की तुलना 'नरक' से करने पर दिया तीखा जवाब
- byvarsha
- 24 Apr, 2026
pc: livehindustan
इस बार, देश में ईरानी एम्बेसी ने US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप पर भारत की तुलना 'नरक' से करने पर तंज कसा है। मुंबई में ईरानी एम्बेसी ने ट्रंप को सलाह दी है कि पहले देखें कि भारत कैसा है और फिर उस पर कमेंट करें। उन्होंने सोशल मीडिया पर 17 सेकंड का एक वीडियो भी पोस्ट किया है। नई दिल्ली ने गुरुवार को US प्रेसिडेंट का नाम लिए बिना ट्रंप के कमेंट्स पर अपनी स्थिति साफ की। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी जारी है। ऐसे में ईरानी एम्बेसी का ट्रंप पर यह तंज काफी अहम माना जा रहा है।
मुंबई में ईरानी एम्बेसी के सोशल मीडिया हैंडल से महाराष्ट्र का एक छोटा वीडियो पोस्ट किया गया है। इसमें महाराष्ट्र की शहरी जिंदगी, कल्चर और नेचर के अलग-अलग पहलुओं को दिखाया गया है। ईरानी एम्बेसी ने 17 सेकंड का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “किसी को ट्रंप के लिए एकतरफ़ा कल्चरल डिटॉक्स का इंतज़ाम करना चाहिए ('डिटॉक्सिफ़िकेशन' शब्द का छोटा रूप यही है। इसका मतलब है शरीर से नुकसानदायक चीज़ें निकालना)। शायद इससे उनकी 'बकवास' (बुरी भाषा) कम हो जाए। कभी अपनी आँखों से आकर देखो कि इंडिया कैसा है। फिर बाद में इस बारे में बात करो।”
यह विवाद सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर ट्रंप के एक पोस्ट से शुरू हुआ। US प्रेसिडेंट ने ट्रुथ सोशल पर पॉलिटिकल कमेंटेटर और रेडियो होस्ट माइकल सैवेज का एक पॉडकास्ट लिखकर पोस्ट किया। उस पोस्ट में, वह जन्म से नागरिकता पर US सुप्रीम कोर्ट की दलीलों की बुराई करते दिख रहे हैं। उन्होंने लिखा, ‘यहां (अमेरिका में) एक बच्चा पैदा होते ही अपने आप नागरिक बन जाता है। उसके बाद, वे पूरे परिवार को चीन, भारत या दुनिया के किसी भी ‘नरक’ से ले आते हैं।’ साथ ही, उन्होंने चीनियों और भारतीयों को ‘लैपटॉप वाले गुंडे’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय और चीनी अमेरिकी झंडे को रौंदते हैं।
इस पोस्ट को लेकर गुरुवार से ही विवाद शुरू हो गया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस मामले में एक बयान जारी किया। हालांकि, इसमें सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति का नाम नहीं लिया गया। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक लिखित बयान में कहा कि ये कमेंट्स बिना जानकारी के किए गए थे। ये भद्दे हैं और ऐसे कमेंट्स नहीं किए जाने चाहिए। भारत-अमेरिका के डिप्लोमैटिक रिश्ते लंबे समय से आपसी सम्मान और एक-दूसरे के हितों की रक्षा पर आधारित रहे हैं। यह भारत-अमेरिका के रिश्तों को नहीं दिखाता है।






