CGHS ने ECHS लाभार्थियों के लिए शहरों की केटेगरी की स्पष्टता दी, कई सैटेलाइट शहर अब दिल्ली-गोवा के बराबर

पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) ने ECHS (एक्स-सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम) के लाभार्थियों के लिए शहरों की केटेगरी को स्पष्ट कर दिया है। इस फैसले से उन हजारों परिवारों को राहत मिलेगी, जो बड़े शहरों के आसपास रहने के बावजूद इलाज के समय दरों को लेकर असमंजस में रहते थे।

अब तक इलाज के दौरान यह स्पष्ट नहीं होता था कि सैटेलाइट शहरों में रहने वाले लाभार्थियों पर बड़े शहरों की दरें लागू होंगी या छोटे शहरों की। इस वजह से अस्पतालों और मरीजों के बीच विवाद की स्थिति बन जाती थी और कई बार मरीजों को अतिरिक्त भुगतान भी करना पड़ता था।

सरकारी आदेश के बाद आई स्पष्टता

CGHS की यह स्पष्टता 5 दिसंबर 2025 को जारी आदेश के बाद सामने आई है। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि CGHS-एम्पैनल्ड अस्पतालों में इलाज के दौरान ECHS लाभार्थियों पर कौन-सी दरें लागू होंगी, खासकर उन मामलों में जहां लाभार्थी मुख्य शहरों से सटे इलाकों में रहते हैं।

क्यों जरूरी था यह फैसला

CGHS ने माना कि बड़ी संख्या में ECHS लाभार्थी दिल्ली, चंडीगढ़, जालंधर, गोवा और पोर्ट ब्लेयर जैसे शहरों के आसपास के सैटेलाइट टाउन में रहते हैं। इन इलाकों में स्थित अस्पतालों में अक्सर यह भ्रम रहता था कि किस शहर की दरें लागू होंगी।

नई व्यवस्था के बाद यह भ्रम पूरी तरह खत्म हो जाएगा और लाभार्थियों को सही केटेगरी के अनुसार इलाज की सुविधा मिलेगी।

CGHS दरें कैसे तय होती हैं

CGHS के तहत इलाज की दरें X, Y और Z केटेगरी के आधार पर तय की जाती हैं। यह वर्गीकरण केंद्रीय कर्मचारियों के लिए तय किए गए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की श्रेणियों से जुड़ा होता है।

CGHS-एम्पैनल्ड अस्पताल इन्हीं केटेगरी के अनुसार इलाज, कमरे का किराया, जांच और अन्य चिकित्सा सेवाओं की फीस तय करते हैं।

किन शहरों को मिला बड़े शहरों के बराबर दर्जा

CGHS की नई स्पष्टता के अनुसार:

  • राष्ट्रीय राजधानी के आसपास स्थित कुछ सैटेलाइट शहरों को दिल्ली (X-क्लास / टियर-1) के बराबर माना जाएगा।
  • जालंधर कैंट को जालंधर (Y-क्लास / टियर-2) के समान दर्जा दिया गया है।
  • गोवा और पोर्ट ब्लेयर को Y-क्लास / टियर-2 की दरों पर रखा गया है।
  • पंचकूला और SAS नगर (मोहाली) को चंडीगढ़ (Y-क्लास / टियर-2) के बराबर माना जाएगा।

लाभार्थियों को क्या फायदा होगा

इस फैसले से अब सैटेलाइट शहरों में रहने वाले ECHS लाभार्थियों को इलाज के दौरान किसी तरह की असमंजस की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्हें पहले से पता होगा कि किस केटेगरी की दरें लागू होंगी, जिससे आर्थिक बोझ और विवाद दोनों कम होंगे।

CGHS की यह पहल पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ा राहत कदम है। इससे न केवल इलाज प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता और भरोसा भी बढ़ेगा।