दो दिनों में सोना-चांदी की बड़ी गिरावट, निवेशकों की संपत्ति से उड़े 5 लाख करोड़ डॉलर

अमेरिकी फेड चेयरमैन की नियुक्ति और डॉलर की मजबूती से टूटी कीमती धातुओं की कीमतें

दुनियाभर में सोना और चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। केवल दो कारोबारी सत्रों—30 जनवरी और 1 फरवरी—में ही लगभग 5 लाख करोड़ डॉलर (करीब 450 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति बाजार से साफ हो गई। यह गिरावट हाल के वर्षों में कीमती धातुओं में देखी गई सबसे तेज गिरावटों में से एक मानी जा रही है।

कुछ ही हफ्तों पहले तक सोना और चांदी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे थे और निवेशकों को शानदार रिटर्न दे रहे थे। लेकिन अचानक बाजार का रुख बदल गया और दोनों धातुओं में तेज बिकवाली देखने को मिली।

फेड की नई नियुक्ति बनी गिरावट की मुख्य वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन की नियुक्ति है। केविन वार्श को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिन्हें सख्त मौद्रिक नीति का समर्थक माना जाता है।

इस नियुक्ति के बाद बाजार में यह उम्मीद बनने लगी है कि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं या आगे और बढ़ सकती हैं। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जिसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है।

दो दिनों में करीब 19% टूटा सोना

सोने की कीमतों में दो दिनों के भीतर लगभग 18 से 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसका असर गोल्ड ईटीएफ पर भी साफ दिखाई दिया, जहां निवेशकों की भारी बिकवाली देखी गई।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है। लंबे समय के नजरिए से सोने का आउटलुक अब भी सकारात्मक बना हुआ है, खासकर तब जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी हुई है।

रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक

चॉइस वेल्थ के सीईओ निकुंज सर्राफ के अनुसार, इस गिरावट को पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने बताया कि 29 जनवरी को एमसीएक्स पर सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, जिसके बाद मुनाफावसूली होना तय था।

उनका कहना है,
“फेड चेयरमैन की घोषणा के बाद यह संकेत मिला कि अमेरिका में मौद्रिक नीति सख्त हो सकती है। इससे डॉलर मजबूत हुआ और मेटल्स की कीमतों पर दबाव बना। निवेशकों को घबराहट में अपने निवेश नहीं बेचने चाहिए।”

निवेशकों के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए। आमतौर पर कुल निवेश का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा सोने में होना चाहिए ताकि पोर्टफोलियो को स्थिरता और विविधता मिल सके।

जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी इससे कम है, वे इस गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देख सकते हैं।

चांदी में और भी तेज गिरावट

चांदी की कीमतों में गिरावट सोने से ज्यादा तेज रही है। कुछ विश्लेषकों ने इसकी तुलना 1980 के दशक की ऐतिहासिक गिरावट से की है। चांदी आधारित ईटीएफ में भी भारी नुकसान दर्ज किया गया है।

हालांकि जानकारों का मानना है कि कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है और लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए।

निष्कर्ष

सोना और चांदी की कीमतों में आई इस अचानक गिरावट ने वैश्विक निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल अल्पकालिक सुधार हो सकता है। लंबी अवधि में कीमती धातुएं फिर से मजबूती पकड़ सकती हैं।

निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे भावनाओं में आकर फैसले न लें, बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्यों और रणनीति के अनुसार निवेश बनाए रखें।