शहरी परिवारों के लिए खुशखबरी! PMAY-U 2.0 से घर खरीदना, बनाना और किराये पर लेना होगा आसान
- byrajasthandesk
- 05 Jan, 2026
देश के शहरी इलाकों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए अपना घर आज भी एक सपना बना हुआ है। महंगे मकान, लगातार बढ़ता किराया और सीमित आय इस सपने को पूरा होने से रोक देते हैं। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0) की शुरुआत की है।
इस नई योजना में पात्रता नियम, आय सीमा और निगरानी प्रणाली में अहम बदलाव किए गए हैं, ताकि सही लाभार्थियों तक सीधी मदद पहुंच सके।
PMAY-U 2.0 क्या है?
PMAY-U 2.0, प्रधानमंत्री आवास योजना का दूसरा चरण है, जो शहरी क्षेत्रों के लिए लागू किया गया है। इसके तहत पात्र परिवारों को घर बनाने, खरीदने या किराये पर लेने के लिए केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता मिलेगी।
यह योजना 2024 से 2029 तक पांच वर्षों तक लागू रहेगी। इसका लक्ष्य है कि कोई भी योग्य शहरी परिवार पक्के घर से वंचित न रहे।
कौन कर सकता है आवेदन?
PMAY-U 2.0 के लिए आवेदन वही परिवार कर सकते हैं:
- जो शहरी क्षेत्र में रहते हों
- जिनके पास देश में कहीं भी पक्का मकान न हो
- जो EWS, LIG या MIG वर्ग में आते हों
यदि किसी व्यक्ति ने पिछले 20 वर्षों में किसी सरकारी आवास योजना का लाभ लिया है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होगा।
EWS, LIG और MIG की आय सीमा
- EWS: सालाना आय ₹3 लाख तक
- LIG: सालाना आय ₹3 से ₹6 लाख
- MIG: सालाना आय ₹6 से ₹9 लाख
इन आय सीमाओं से ज्यादा शहरी परिवारों को योजना में शामिल किया जा सकेगा।
घर खरीदने, बनाने और किराये पर लेने की सुविधा
PMAY-U 2.0 केवल घर खरीदने तक सीमित नहीं है। इसके तहत:
- अपनी जमीन पर घर बनाने
- सस्ता रेडी-टू-मूव मकान खरीदने
- सरकारी किराये के घरों में रहने
के लिए भी सहायता दी जाएगी। यह व्यवस्था खासतौर पर प्रवासी मजदूरों और किराये पर रहने वाले परिवारों के लिए फायदेमंद है।
जियो-टैगिंग क्या है और क्यों जरूरी है?
योजना में पारदर्शिता लाने के लिए जियो-टैगिंग को अनिवार्य किया गया है। इसमें निर्माण से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो में लोकेशन जोड़ी जाती है।
इससे यह पता चलता है कि:
- मकान कहां बन रहा है
- किस चरण में निर्माण है
- सरकारी पैसा सही जगह खर्च हो रहा है या नहीं
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में यह प्रणाली पहले ही सफल साबित हो चुकी है।
AHP प्रोजेक्ट्स में जियो-टैगिंग कैसे होगी?
अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (AHP) प्रोजेक्ट्स में पांच चरणों पर जियो-टैगिंग की जाएगी:
- लेआउट
- नींव
- ढांचा
- फिनिशिंग
- बुनियादी सुविधाओं के साथ पूर्णता
इसके लिए BHARAT App का इस्तेमाल किया जाएगा।
PMAY-U 2.0 क्यों है शहरी परिवारों के लिए बड़ी राहत?
PMAY-U 2.0 न सिर्फ आर्थिक मदद देता है, बल्कि डिजिटल निगरानी के जरिए पारदर्शिता भी सुनिश्चित करता है। इससे समय पर घर बनेंगे, गड़बड़ियां कम होंगी और ज्यादा परिवारों को लाभ मिलेगा।
शहरों में महंगे किराये और अस्थिर आवास से जूझ रहे लोगों के लिए यह योजना एक सुरक्षित और स्थायी भविष्य की ओर बड़ा कदम है।






