राजस्थान भाजपा में बड़े बदलाव की तैयारी: संगठन विस्तार के साथ 2028 की रणनीति पर फोकस

जयपुर: राजस्थान भाजपा में संगठनात्मक बदलाव की हलचल तेज हो गई है। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ जल्द ही पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक बुलाने वाले हैं, जिसमें प्रदेश, मंडल और जिला स्तर पर नई नियुक्तियों और कार्यकारिणी के गठन को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस बैठक के बाद प्रदेश भाजपा की नई कार्यकारिणी का औपचारिक ऐलान भी किया जा सकता है।

नई कार्यकारिणी में बड़े बदलाव संभव

प्रदेश भाजपा में चार जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को छोड़कर लगभग सभी संगठनात्मक चुनाव पूरे हो चुके हैं। ऐसे में मदन राठौड़ की नई टीम के गठन का रास्ता साफ हो गया है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा इस बार संगठन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने पर जोर देगी। इसमें आदिवासी, दलित, ओबीसी और युवा नेताओं को प्राथमिकता दी जा सकती है। इस फेरबदल के चलते लगभग 50% पुराने नेताओं की जगह नए चेहरों को मौका दिए जाने की संभावना है। हालांकि, बूथ अध्यक्षों और मंडल कमेटियों का गठन अभी बाकी है, जिसे जल्द ही पूरा किया जाएगा।

किन नेताओं पर गिर सकती है गाज?

भाजपा की नई कार्यकारिणी में युवा और जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह देने की योजना बनाई जा रही है। ऐसे में कई वरिष्ठ नेताओं की संगठन से छुट्टी हो सकती है। संभावित नेताओं में राज्यसभा सांसद चुन्नी लाल गरासिया, किसान आयोग के अध्यक्ष सी.आर. चौधरी, भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल, ओमप्रकाश भड़ाना, श्रवण सिंह बगड़ी, संतोष अहलावत और मुकेश दाधीच जैसे नाम प्रमुख हैं। पार्टी की रणनीति के तहत अनुभवी नेताओं की जगह ऊर्जावान और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को आगे लाने की तैयारी है।

भाजपा की नजर 2028 के चुनावों पर

राजस्थान में 2028 में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा अपने संगठन को और मजबूत करने में जुटी है। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का कार्यकाल भी 2028 तक रहेगा, इसलिए इस पूरे बदलाव को उसी रणनीति के तहत देखा जा रहा है। भाजपा का मानना है कि युवा और सक्रिय नेताओं को संगठन में जगह देने से बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत होगी और पार्टी को चुनावों में इसका लाभ मिलेगा।

भाजपा का फोकस खासतौर पर आदिवासी और दलित समुदाय को संगठन में अधिक से अधिक जोड़ने पर है। पार्टी की रणनीति साफ है कि जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह देकर 2028 के चुनावों में दमदार प्रदर्शन किया जाए।

क्या होंगे आगामी कदम?

भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि अप्रैल में ही नई कार्यकारिणी का गठन किया जा सकता है। इसके साथ ही बूथ स्तर पर संगठन को सशक्त करने के लिए नए अध्यक्षों और कार्यकारिणी सदस्यों की नियुक्ति भी की जाएगी। संगठन के इस बदलाव से न केवल पार्टी के अंदरूनी ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि 2028 के चुनावों के लिए एक प्रभावी रणनीति भी तैयार हो सकेगी।