Sawan 2026: शिवलिंग पर जल चढ़ाने के ये नियम हैं सबसे खास, अगर आप भी करेंगे ऐसे अभिषेक तो मिलेगा...
- byShiv
- 18 Aug, 2026
इंटरनेट डेस्क। सावन माह के पूरे होने में अब कुछ ही दिन बाकी है। सावन का प्रत्येक दिन शिव आराधना के लिए अति उत्तम माना गया है। मान्यता है कि भगवान शिव पर सिर्फ जल अर्पित करने मात्र से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। अपने भक्तों से शीघ्र प्रसन्न होने के कारण भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिव जी को जल चढ़ाने के पांच नियम हैं। जिनका पालन करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव होते हैं।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम
सीधा जल चढ़ानाः भगवान शिव के अभिषेक करने का पहला तरीका है जल लाकर सीधे भगवान शिव के शिवलिंग पर अर्पित कर देना। मान्यता है कि जलाभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और कष्टों से छुटकारा मिलता है।
दक्षिण दिशा में बैठकर उत्तर की ओर जल अर्पित करना
भगवान शिव को जलाभिषेक करने का दूसरा नियम है, जलाधारी से जल जिस दिशा (उत्तर) में बहकर जाता है, उसके ठीक विपरीत यानी दक्षिण दिशा में खड़े या बैठकर, उत्तर की ओर मुख करके जल चढ़ाना। मान्यता है कि शिवलिंग के जलाभिषेक यह तरीका रोग मुक्ति और रोगों पर विजय दिलाता है।
अशोक सुंदरी से शिवलिंग तक जल चढ़ाना
जल की धारा को शिवलिंग के जला धारी पर स्थित माता अशोक सुंदरी के स्थान से शुरू करते हुए धीरे-धीरे शिवलिंग तक लेकर जाना और जल अर्पित करना। यह शिव जी पर जल चढ़ाने का तीसरा नियम है। मान्यता है कि ऐसा करने से कार्य सिद्ध होते हैं।
पांच स्थानों पर जल अर्पित करना
भगवान शिव को जल चढ़ाने का चौथा नियम है कि एक ही लोटे से क्रमबद्ध तरीके से 5 जगहों पर जल चढ़ाना। सबसे पहले गणेश जी, फिर कार्तिकेय जी, इसके बाद माता अशोक सुंदरी, फिर मुख्य जलाधारी और अंत में शिवलिंग पर चल अर्पित करना।
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