Shravan 2026: हरी चूड़ियों और सावन के बीच क्या कनेक्शन है? जानिए धार्मिक और ज्योतिषीय कारण

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श्रावण का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस महीने शिव की पूजा की जाती है। श्रावण का महीना प्रकृति में खिली हरियाली के लिए खास माना जाता है। श्रावण का महीना 13 अगस्त से शुरू हुआ है और 11 सितंबर को खत्म होगा। इस महीने में कई त्योहार, व्रत और रीति-रिवाज होते हैं। महिलाएं उस दिन सजती-संवरती हैं।

श्रावण का महीना आते ही बाजार हरी चूड़ियों, हरी साड़ियों और मेहंदी से भर जाते हैं। जिन दुकानों और स्टॉल पर ये चीजें मिलती हैं, वहां शादीशुदा महिलाओं की भारी भीड़ देखी जा सकती है, और दुकानदार भी श्रावण के लिए खास 'कलेक्शन' पेश करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरा रंग प्रकृति, खुशहाली, सौभाग्य और खुशी का प्रतीक माना जाता है। चूंकि श्रावण के महीने में हर जगह हरियाली दिखाई देती है, इसलिए यह रंग खास तौर पर इस मौसम से जुड़ा है। आइए जानें कि श्रावण के महीने में हरी चूड़ियां पहनना क्यों शुभ माना जाता है।

प्रकृति और प्रकृति पूजा से संबंध
श्रावण में हर जगह हरियाली फैली होती है। हरे रंग को प्रकृति, खुशहाली और जीवन का प्रतीक माना जाता है। श्रावण में प्रकृति की पूजा होती है, इसलिए महिलाएं इस रंग की चूड़ियां पहनकर प्रकृति के प्रति अपना आभार जताती हैं।

हरा रंग सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है 
पति की लंबी उम्र और दुनिया में खुशहाली के लिए श्रावण में हरी चूड़ियां पहनना बहुत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि जब देवी पार्वती ने महादेव को खुश करने के लिए कठोर तपस्या की थी, तो उन्होंने हरा रंग पहना था, जो प्रकृति के साथ मेल खाता है।

मानसिक शांति और पॉजिटिव एनर्जी देता है 
कलर थ्योरी के अनुसार, हरा रंग आंखों और दिमाग के लिए शांत करने वाला रंग है। श्रावण के दौरान वातावरण में नमी के कारण मन और शरीर पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में हरा रंग फायदेमंद होता है। चूड़ियों की खनक से घर में पॉजिटिव एनर्जी पैदा होती है।

हरी चूड़ियां पहनने के आयुर्वेदिक फायदे 
कलाई पर चूड़ियों का लगातार घर्षण और दबाव शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखने में मदद करता है। साथ ही, ऐसी मान्यता है कि कांच की चूड़ियां शरीर में अतिरिक्त एनर्जी को कंट्रोल में रखती हैं। श्रावण के महीने में हरी चूड़ियां पहनना सिर्फ़ सुंदरता या परंपरा की बात नहीं है, बल्कि इसे सेहत, मन की शांति और प्रकृति के प्रति सम्मान का एक सुंदर मेल माना जाता है।