Sonipat: करोड़ों के कारोबारी की वृद्धाश्रम में हुई मौत, तीनों बेटियों ने अंतयेष्ठि में आने से किया इनकार, 5100 रु. भेज कहा, वीडियो कॉल पर दिखा दे...
- byShiv
- 06 Aug, 2026
इंटरनेट डेस्क। आपने देखा होगा की हर माता पिता का सपना होता हैं की उनकी संतान बड़ी होकर उनकी सेवा करें और बुढ़ापे में उनका सहारा बने। इसके लिए मां बाप बच्चों के बचपन से ही दिन-रात मेहनत करते हैं, अपनी इच्छाओं का त्याग करते हैं और पूरी जिंदगी उनकी खुशियों के नाम कर देते हैं। लेकिन सफलता के साथ संस्कार बच्चों को न मिले तो फिर जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर मां बाप को बुरे दिन देखने पड़ते है। एक ऐसी ही घटना सामने आई हैं सोनीपत में।
तीन बेटियों में से एक भी नई आई
सोनीपत के बुजुर्ग शिवचरण गुप्ता ने मुंबई में करोड़ों रुपये का कपड़ा कारोबार खड़ा किया। सबकुछ बच्चों के लिए किया। अपनी पूरी जिंदगी परिवार के लिए खपा दी। मगर उम्र के अंतिम वर्षों में उन्हें वृद्धाश्रम का सहारा लेना पड़ा। और जब उनकी अंतिम यात्रा का समय आया, तब उनकी तीनों बेटियां भी उनके साथ नहीं थीं। मंगलवार को उनके निधन के बाद सामाजिक संस्था ने तीनों बेटियों को सूचना दी कि वे अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने आ जाएं। लेकिन जवाब मिला, समय नहीं है, दूरी ज्यादा है, इसलिए आना संभव नहीं। इनमें से एक बेटी ने अंतिम संस्कार के खर्च के लिए 5,500 रुपये भेज दिए और अनुरोध किया कि अंतिम संस्कार की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग भेज दी जाए। उसने अपने पिता की अंतिम विदाई वीडियो कॉल पर देखी, लेकिन कंधा देने नहीं पहुंची।
बुजुर्ग पर आया सबको तरस
यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया। समाज कल्याण समिति के सदस्यों ने ही उन्हें अंतिम विदाई दी। उनका कहना था कि बच्चों को सिर्फ सफल बनाना पर्याप्त नहीं है, उन्हें ऐसे संस्कार भी देने जरूरी हैं जो माता-पिता के अंतिम समय में उनका साथ निभाना सिखाएं।
कारोबार से वृद्धाश्रम तक का सफर
खबरों के अनुसार शिवचरण गुप्ता मूल रूप से सोनीपत के ककरोई गांव के रहने वाले थे। मुंबई में उन्होंने वर्षों की मेहनत से करोड़ों रुपये का कपड़ा कारोबार खड़ा किया। लेकिन कारोबार में नुकसान के बाद करीब तीन साल पहले पत्नी के साथ सोनीपत लौट आए और वृद्धाश्रम में रहने लगे। डेढ़ साल पहले पत्नी का निधन हो गया। इसके बाद अकेलापन इतना बढ़ गया कि उन्होंने आश्रम बदल लिया, लेकिन अपनों की कमी कभी पूरी नहीं हुई। आखिरकार उसी आश्रम में उन्होंने अंतिम सांस ली।
pc- jagran,ndtv





