गलत ट्रैफिक चालान आया है? ऐसे करें आपत्ति दर्ज और जुर्माना करा सकते हैं रद्द
- byrajasthandesk
- 25 Jan, 2026
कई बार ऐसा होता है कि बिना किसी ट्रैफिक नियम का उल्लंघन किए भी मोबाइल पर चालान का मैसेज आ जाता है। न तो गाड़ी उस जगह मौजूद होती है और न ही चालक ने कोई गलती की होती है, फिर भी जुर्माना कट जाता है। पहले लोग ऐसे चालानों को नजरअंदाज कर देते थे, लेकिन अब सरकार ने साफ कर दिया है कि गलत चालान को चुनौती देना हर नागरिक का अधिकार है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने ट्रैफिक और ई-चालान से जुड़े मामलों के लिए एक नई और स्पष्ट प्रक्रिया लागू की है, जिससे आम लोग आसानी से अपने चालान को चुनौती दे सकते हैं।
क्या ट्रैफिक चालान को चुनौती दी जा सकती है?
हां, बिल्कुल। यदि आपको लगता है कि आपके नाम जारी किया गया चालान गलत है, तो आप उसे चुनौती दे सकते हैं। चालान मिलने के बाद आपके पास 45 दिन का समय होता है।
इस अवधि के भीतर आपको केंद्रीय ई-चालान पोर्टल पर जाकर यह तय करना होगा कि आप चालान स्वीकार कर रहे हैं या उस पर आपत्ति दर्ज कर रहे हैं। अगर आप चालान को चुनौती देते हैं, तो आपको अपने पक्ष में दस्तावेजी प्रमाण भी अपलोड करने होंगे।
यदि 45 दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं की जाती, तो माना जाएगा कि आपने चालान स्वीकार कर लिया है।
चालान का भुगतान कब जरूरी होगा?
अगर आपने 45 दिनों के अंदर चालान को चुनौती नहीं दी, तो यह स्वीकृत मान लिया जाएगा। इसके बाद आपको अगले 30 दिनों में जुर्माना भरना होगा। यानी कुल मिलाकर चालान जारी होने की तारीख से 75 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य होगा।
भुगतान ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है। पहले 90 दिन बाद चालान अपने आप वर्चुअल कोर्ट में चला जाता था, जिससे कई मामलों में कार्रवाई अटक जाती थी। नए नियमों में यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है।
जब आप चालान को चुनौती देते हैं तो क्या होता है?
पोर्टल के माध्यम से आपत्ति दर्ज करने के बाद संबंधित अधिकारी को 30 दिनों के भीतर फैसला करना होगा। आपके द्वारा दिए गए दस्तावेज और स्पष्टीकरण की जांच की जाएगी।
यदि अधिकारी आपकी बात से सहमत होता है, तो चालान रद्द कर दिया जाएगा और यह आदेश लिखित रूप में पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
यदि आपकी आपत्ति खारिज की जाती है, तो उसका कारण भी स्पष्ट रूप से बताया जाएगा और फिर आपको 30 दिनों के भीतर चालान राशि जमा करनी होगी।
अगर फैसले से संतुष्ट नहीं हैं तो क्या करें?
यदि आप अधिकारी के निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं, तो आप अदालत का सहारा ले सकते हैं। इसके लिए पहले आपको चालान की राशि का 50 प्रतिशत जमा करना होगा।
अगर न तो भुगतान किया गया और न ही कोर्ट में चुनौती दी गई, तो आदेश अंतिम माना जाएगा और शेष राशि 15 दिनों के भीतर जमा करनी होगी।
चालान नहीं भरने पर क्या होगा?
यदि तय समयसीमा के भीतर चालान का भुगतान नहीं किया गया, तो रोजाना नोटिस भेजे जाएंगे। इसके बावजूद भुगतान नहीं होने पर आपका ड्राइविंग लाइसेंस या वाहन पंजीकरण “Not to be Transacted” के रूप में चिन्हित कर दिया जाएगा।
इसका मतलब यह होगा कि:
- आरसी ट्रांसफर
- लाइसेंस रिन्यूअल
- डुप्लीकेट दस्तावेज
जैसी सेवाएं रोक दी जाएंगी। हालांकि टैक्स से जुड़ी सेवाएं इससे बाहर रहेंगी।
क्या ये नियम सभी चालानों पर लागू होंगे?
ये नियम केवल कंपाउंडेबल चालानों पर लागू होंगे, यानी ऐसे चालान जिनका निपटारा मौके पर या पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है।
नॉन-कंपाउंडेबल मामलों में अभी भी कोर्ट प्रक्रिया जरूरी होगी। हालांकि सरकार जन विश्वास विधेयक 2.0 के तहत अधिकतर अपराधों को कंपाउंडेबल बनाने की योजना पर काम कर रही है।
किन राज्यों में चालान निपटाने की गति धीमी है?
आंकड़ों के अनुसार:
- दिल्ली में केवल 23% चालानों का निपटारा हुआ है
- गोवा और जम्मू-कश्मीर में यह दर 94% तक पहुंच चुकी है
- बिहार में 23%, उत्तर प्रदेश में 25% और अरुणाचल प्रदेश में सिर्फ 14% चालान निपटाए गए हैं
जनवरी 2015 से अब तक देशभर में 41 करोड़ से अधिक चालान जारी किए गए, जिनकी कुल राशि लगभग ₹62,212 करोड़ रही। इनमें से केवल 15.6 करोड़ चालानों का निपटारा हुआ है।
अगर आपके नाम गलत चालान जारी हो गया है, तो उसे अनदेखा न करें। सरकार ने एक पारदर्शी और आसान प्रक्रिया बनाई है जिससे आप समय पर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। सही दस्तावेज और समय पर कार्रवाई आपको बेवजह जुर्माना भरने से बचा सकती है और आपके ड्राइविंग रिकॉर्ड को सुरक्षित रख सकती है।






