दिल्ली में शुरू होगी ‘लखपति बिटिया योजना’, ग्रेजुएशन तक बेटियों को मिलेगी आर्थिक मदद

दिल्ली सरकार राजधानी की बेटियों के लिए एक नई और मजबूत कल्याणकारी योजना शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि वर्ष 2008 में शुरू की गई ‘लाडली योजना’ को बंद कर अप्रैल 2026 से ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’ लागू की जाएगी।

यह नई योजना बेटियों को जन्म से लेकर ग्रेजुएशन या डिप्लोमा पूरा करने तक आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा के अभाव में कोई भी लड़की पीछे न रह जाए और स्कीम की मैच्योरिटी पर लाभार्थी को कम से कम ₹1 लाख की राशि मिले।

क्या है लखपति बिटिया योजना?

लखपति बिटिया योजना, मौजूदा लाडली योजना का उन्नत और अधिक प्रभावी स्वरूप है। मुख्यमंत्री के अनुसार, समय के साथ शिक्षा और जीवन-यापन की लागत बढ़ गई है, जिसे ध्यान में रखते हुए इस योजना को नए सिरे से डिजाइन किया गया है।

इस योजना के तहत आर्थिक सहायता अलग-अलग चरणों में दी जाएगी, जो बच्ची की उम्र और पढ़ाई के स्तर से जुड़ी होगी। इसकी शुरुआत जन्म से होगी और उच्च शिक्षा पूरी होने पर राशि मैच्योर होगी।

कितनी मिलेगी आर्थिक सहायता?

सरकार की ओर से प्रति लाभार्थी ₹56,000 की सहायता दी जाएगी, जिसे एक संरचित वित्तीय साधन के जरिए निवेश किया जाएगा। समय के साथ यह राशि बढ़कर कम से कम ₹1 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है।

मैच्योरिटी पर पूरी रकम सीधे लाभार्थी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

किन्हें मिलेगा योजना का लाभ?

यह योजना उन लड़कियों पर लागू होगी:

  • जिनका जन्म दिल्ली में हुआ हो
  • जिनका परिवार कम से कम तीन वर्षों से दिल्ली में रह रहा हो
  • जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय ₹1.20 लाख से अधिक न हो
  • जिनकी शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले न हुई हो

प्रति परिवार अधिकतम दो जीवित बेटियों को ही योजना का लाभ मिलेगा।

डिजिटल पोर्टल और बजट व्यवस्था

सरकार योजना के लिए एक अलग डिजिटल पोर्टल लॉन्च करेगी, जिससे पंजीकरण, भुगतान और ट्रैकिंग की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी हो सके।

इस योजना को लागू करने के लिए लगभग ₹160 करोड़ के बजट का अनुमान लगाया गया है। साथ ही, पहले की योजना के तहत चिन्हित करीब 41,000 लाभार्थियों को लगभग ₹100 करोड़ की राशि वितरित करने की भी तैयारी है।

लाडली योजना को क्यों किया गया बंद?

सरकारी समीक्षा में सामने आया कि लाडली योजना के तहत 1.86 लाख से अधिक मैच्योर अकाउंट बिना क्लेम के पड़े थे। इसका मतलब यह था कि बेटियों के लिए तय की गई राशि समय पर उन तक नहीं पहुंच पाई।

इसी कमी को दूर करने के लिए लखपति बिटिया योजना को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया गया है।

बेटियों के भविष्य में निवेश

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस योजना को बेटियों और देश के भविष्य में किया गया निवेश बताया। सरकार का कहना है कि फंड की कमी किसी भी लड़की की पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगी और यह योजना बाल विवाह जैसी सामाजिक समस्याओं को रोकने में भी मदद करेगी।