Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026:आज हैं द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत, जाने पूजा का शुभ मुहूर्त, करें इन मंत्रों का जाप
- byShiv
- 05 Feb, 2026
इंटरनेट डेस्क। आपने देखा होगी की सुहागन महिलाएं चौथ का व्रत करती है। ऐसे में आज द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी है। हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी के व्रत का विशेष महत्व है। हर महीने की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस पावन दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। आइये जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि क्या है।
पूजा के शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने तथा भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी प्रकार के संकट और विघ्न दूर होते हैं। आज के दिन पूजा के दो मुहूर्त काफी फलदायी हैं।
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.13 बजे से 12.57 बजे तक व्याप्त रहेगा
लाभ-उन्नति मुहूर्त यह भी दोपहर 12.35 बजे से 01.57 बजे तक है
संकष्टी व्रत में चंद्रोदय का महत्व
संकष्टी चतुर्थी का व्रत दिनभर उपवास रखकर किया जाता है और रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। चंद्रमा को जल अर्पित करने के बाद भगवान गणेश की पूजा की जाती है और फिर व्रत खोला जाता है।
गणपति साधना मंत्र
इस दिन निम्न मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है
गणेश मूल मंत्र - ॐ गं गणपतये नमः
द्विजप्रिय गणेश मंत्र - ॐ द्विजप्रियाय नमः
चंद्र अर्घ्य मंत्र ‘ ॐ सोम सोमाय नमः
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