Guru Pushyamrit Yoga: गुरुपुष्यामृत योग क्या है? जानिए इस दौरान कौन से काम करने चाहिए
- byvarsha
- 21 May, 2026
PC: navarashtra
ज्योतिष में गुरुपुष्यामृत योग को बहुत ही शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है। यह योग तब बनता है जब बृहस्पति का दिन यानी गुरुवार और पुष्प नक्षत्र एक ही दिन आते हैं। इसे अमृत योग भी कहते हैं। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए शुभ काम लंबे समय तक फायदा देते हैं। पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों में सबसे शुभ माना जाता है। इसमें गुरुवार होने से इस योग का महत्व और भी बढ़ जाता है।
इस योग का धार्मिक महत्व
ज्योतिष के अनुसार, यह योग धन, ज्ञान, तरक्की और पॉजिटिव एनर्जी बढ़ाने वाला माना जाता है। गुरुपुष्यामृत योग के दिन कोई नया काम शुरू करना शुभ माना जाता है। बहुत से लोग इस दिन सोना, चांदी, गाड़ी, घर या दूसरी कीमती चीजें खरीदते हैं। इस दिन नया बिजनेस शुरू करना, इन्वेस्ट करना, बैंक अकाउंट खोलना या जरूरी कॉन्ट्रैक्ट करना बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक तौर पर भी इस योग का खास महत्व है। इसके साथ ही, स्टूडेंट्स के लिए नया कोर्स शुरू करने, किताब खरीदने या कोई नई स्किल सीखने के लिए यह समय अच्छा माना जाता है। कहा जाता है कि इस दौरान आपको मनचाही सफलता मिलती है।
धार्मिक अनुष्ठान और दान
इस दिन भगवान विष्णु, भगवान बृहस्पति और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। कुछ लोग गुरु मंत्र का जाप करते हैं, दान करते हैं और धार्मिक किताबें पढ़ते हैं। लोगों का मानना है कि इस योग के दौरान किया गया दान, जाप और शुभ काम ज़्यादा फलदायी होते हैं। इसलिए, बिज़नेसमैन, गृहस्थ और धार्मिक आस्था रखने वाले लोग इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं।
गुरुपुष्यामृत योग का आध्यात्मिक महत्व
यह योग न केवल भौतिक लाभ के लिए बल्कि मानसिक शांति, पॉजिटिव एनर्जी और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई प्रार्थना और ध्यान मन को स्थिरता देते हैं।
इस दौरान क्या करें
बहस और नेगेटिव विचारों से बचें
किसी को दुख देने वाली बातें न करें
गलत तरीकों से पैसे कमाने की कोशिश न करें
धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने से बचें





