Mahabharata: जब हनुमान जी के पैर रखते ही टूट गया अर्जुन के बाणों का पुल: जानिए महाभारत की यह अनकही कथा

pc: Navbharat times

महाभारत के कई ऐसे अनसुने प्रसंग हैं, जो हमें जीवन का गहरा पाठ पढ़ाते हैं। ऐसा ही एक बेहद लोकप्रिय और रोचक प्रसंग भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन और पवनपुत्र हनुमान जी से जुड़ा है, जो अहंकार और भक्ति के बीच के अंतर को बहुत सुंदर तरीके से समझाता है।

क्या है पूरी पौराणिक कथा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार अर्जुन को अपनी धनुर्विद्या और श्रेष्ठ योद्धा होने पर थोड़ा अहंकार हो गया था। उन्हें लगता था कि उनके बाणों के आगे कोई भी टिक नहीं सकता। इसी बातचीत के दौरान, अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण के सामने दावा किया कि वे चाहें तो अपने बाणों से ऐसा मजबूत पुल बना सकते हैं, जिस पर कोई भी आसानी से चल सके।

श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए अर्जुन की इस चुनौती को स्वीकार कर लिया और उनकी परीक्षा लेने का निर्णय किया।

जब हनुमान जी ने ली परीक्षा
अर्जुन ने बिना देर किए अपनी धनुर्विद्या का कौशल दिखाते हुए बाणों का एक भव्य और मजबूत पुल तैयार कर लिया। तभी वहां एक साधारण वानर (जो असल में हनुमान जी थे) प्रकट हुए। उन्होंने अर्जुन के उस बाणों के पुल पर सवाल उठाया और उसकी मजबूती परखने के लिए उस पर पैर रखा।

जैसे ही हनुमान जी ने अपना एक पैर उस पुल पर रखा, बाणों से बना वह ढांचा तुरंत चकनाचूर होकर टूट गया। यह देखकर अर्जुन हैरान रह गए। उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि उनके अचूक बाणों से बना पुल एक छोटे से वानर का भार भी नहीं सह पाया।

श्रीकृष्ण ने कैसे बचाई अर्जुन का मान?
अपनी इस हार से अर्जुन का घमंड टूट गया और वे अत्यंत निराश हो गए। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी माया हटाई और वास्तविक स्थिति समझाई। हनुमान जी ने अपने विराट स्वरूप में आकर अर्जुन को दर्शन दिए।

श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाया कि अहंकार इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी है, और हनुमान जी की शक्ति के आगे कोई भी साधारण रचना टिक नहीं सकती। इसके बाद, हनुमान जी ने अर्जुन को आशीर्वाद दिया और महाभारत के युद्ध में उनके रथ के ध्वज पर विराजमान होकर उनकी रक्षा करने का वचन दिया।