Nila Drum Murder Case: फांसी की सजा सुनाते ही पेन की निब क्यों तोड़ देते हैं जज? क्या इसके पीछे हैं कोई कानूनी नियम, जाने आप भी

इंटरनेट डेस्क। मेरठ का ब्लू ड्रम मर्डर मामला बहुत सुर्खियों में रहता है। इस गंभीर अपराध में मर्चेंट नेवी के पूर्व कर्मचारी सौरभ राजपूत की हत्या की गई थी, पत्नी और प्रेमी मुस्कान और साहिल दोषी पाए गए थे, सौरभ राजपूत की हत्या कर शवे के टुकड़े टुकड़े कर ब्लू ड्रम में भर दिया था और सीमेंट डालकर चुन दिया था। अब केस में फैसला आ चुका है। 14 अक्टूबर को कोर्टरूम में न्यायाधीश ने दोनों अपराधियों को मौत की सजा सुनाई और फिर बॉलपॉइंट पेन की निब को तोड़ते हुए डस्टबिन में फेंक दिया गया। 

पेन की निब तोड़ना या पेन क्यों फेंका जाता हैं
हमने कई फिल्मों में देखा की जज फांसी की सजा सुनाने के बाद पेन की निब को तोड़ देता है। लेकिन क्या यह सच में होता हैं, ऐसा गुरूवार को भी देखने को मिला, मेरठ में कोर्ट फैसला सुनाने के लिए इस्तेमाल किए गए पेन को डस्टबिन में डालने के जज के फैसले ने भी वकीलों और कोर्ट में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। 

क्यों किया जाता हैं ऐसा
जानकारी के अनुसार फांसी की सजा सुनाने के बाद जज द्वारा पेन की निब तोड़ने या फेंकने के पीछे कोई कानूनी नियम नहीं है, बल्कि यह एक प्रतीकात्मक परंपरा है। इसके पीछे मुख्य कारण ये माने जाते हैं।

फैसला नहीं बदले
ऐसी मान्यता है कि एक बार मौत की सजा लिखने के बाद जज को खुद अपना फैसला बदलने या उस पर पुनर्विचार करने का अधिकार नहीं होता। निब तोड़ना यह दर्शाता है कि यह फैसला अंतिम है।

दोबारा इस्तेमाल न करना
यह माना जाता है कि जिस कलम से किसी व्यक्ति का जीवन समाप्त करने का आदेश लिखा गया हो, उसका उपयोग किसी अन्य कार्य के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

पेन की निब तोड़ने की बात कहां से आई?
कई कानून के जानकार बताते हैं कि पेन की निब तोड़ने की कहानी को अक्सर ब्रिटेन की पुरानी न्याय व्यवस्था से जोड़कर बताया गया है। कहा जाता है कि मौत की सजा सुनाने के बाद पेन की निब तोड़ दी जाती थी, ताकि यह दिखाया जा सके कि उस पेन से अब किसी दूसरे व्यक्ति को मौत की सजा नहीं सुनाई जाएगी।

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