Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष के पूरे 16 दिनों में ये तीन तिथियां होती हैं बहुत ही खास, नहीं भूलना चाहिए कभी भी इनकों
- byShiv
- 24 Sep, 2026
इंटरनेट डेस्क। पितृ पक्ष का हिंदू धर्म में बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। यह समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है, इन दिनों लोग अपने दिवंगत परिजनों को याद करते हैं और उनकी आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान जैसे कर्म करते हैं। पितृ पक्ष की हर तिथि का अपना महत्व है, क्योंकि सामान्य तौर पर जिस तिथि को किसी पूर्वज का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है। हालांकि इस पूरे पक्ष में तीन तिथियां ऐसी मानी जाती हैं, जिनका महत्व खास तौर पर बताया गया है।
महाभरणी श्राद्ध
पितृ पक्ष की खास तिथियों में भरणी श्राद्ध का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इसे कई जगह महाभरणी श्राद्ध भी कहा जाता है। भरणी नक्षत्र से जुड़ा होने के कारण इस श्राद्ध का अपना विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। परंपराओं के अनुसार, किसी परिजन की मृत्यु के बाद एक वर्ष पूरा होने पर भरणी श्राद्ध करने की परंपरा कई परिवारों में है। वहीं अविवाहित व्यक्ति की मृत्यु होने पर भी भरणी श्राद्ध को विशेष माना जाता है। 2026 में महाभरणी श्राद्ध 29 सितंबर को पड़ेगा।
मातृ नवमी
पितृ पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी कहा जाता है। यह दिन विशेष रूप से परिवार की दिवंगत महिलाओं और मातृ पक्ष के पूर्वजों को समर्पित माना जाता है। इस दिन मां, दादी, नानी या परिवार की अन्य दिवंगत महिला सदस्यों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है।
सर्वपितृ अमावस्या
पितृ पक्ष की सभी तिथियों में सर्वपितृ अमावस्या को सबसे महत्वपूर्ण दिनों में गिना जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और इसे महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध किया जा सकता है जिनकी मृत्यु तिथि परिवार को मालूम नहीं है।





