2026 में किराए पर रहें या घर खरीदें? घटती होम लोन ब्याज दरों ने फिर खड़ा किया बड़ा सवाल

भारत में घर खरीदना सिर्फ पैसों का मामला नहीं होता, बल्कि यह सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और जीवन में एक बड़ी उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में यह सपना कई लोगों को पहले से ज्यादा करीब लगता दिख रहा है। इसकी वजह है बीते एक साल में होम लोन ब्याज दरों में आई बड़ी कटौती।

हाल ही में Reserve Bank of India द्वारा नीतिगत दरों में लगभग 1.25 प्रतिशत की कमी के बाद बैंकों ने होम लोन सस्ते कर दिए हैं। नतीजतन, ईएमआई कम हुई है और घर खरीदने की क्षमता बढ़ी है।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। बड़े शहरों में प्रॉपर्टी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे कम ब्याज दरों का फायदा काफी हद तक कम हो जाता है। ऐसे में लोगों के मन में फिर वही पुराना सवाल उठ रहा है—क्या अभी घर खरीदना सही रहेगा या किराए पर रहना ज्यादा समझदारी है?

घर खरीदने की ओर झुकाव क्यों बढ़ा है?

कम ब्याज दरों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मासिक ईएमआई पहले की तुलना में कम हो जाती है। होम लोन की हर किस्त आपके खर्च के साथ-साथ आपकी संपत्ति में हिस्सेदारी भी बढ़ाती है।

किराए के उलट, जहां पैसा हर महीने खर्च होकर खत्म हो जाता है, घर खरीदने से एक स्थायी संपत्ति बनती है। समय के साथ अगर प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती है, तो यह आपके लिए लंबी अवधि का निवेश साबित हो सकता है। लोन चुकाने के बाद आप उस घर को बेच सकते हैं, किराए पर देकर नियमित आय पा सकते हैं या अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित कर सकते हैं।

भावनात्मक स्तर पर भी घर का मालिक होना सुकून देता है। आप बिना किसी अनुमति के घर में बदलाव कर सकते हैं और यह भरोसा रहता है कि कोई मकान मालिक अचानक घर खाली करने को नहीं कहेगा।

किराए पर रहने के फायदे क्यों अब भी मजबूत हैं?

दूसरी ओर, किराए पर रहना आज के दौर में कई लोगों के लिए ज्यादा व्यावहारिक विकल्प है। किराया आमतौर पर होम लोन ईएमआई से कम होता है, जिससे हर महीने कुछ अतिरिक्त पैसा बच जाता है।

इस बचे हुए पैसे को म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार या किसी बिजनेस में निवेश किया जा सकता है। सही योजना और अनुशासन के साथ यह निवेश लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकता है।

नौकरी के बदलते अवसरों के बीच किराए पर रहना ज्यादा लचीलापन देता है। शहर बदलने की जरूरत पड़े तो प्रॉपर्टी बेचने की चिंता नहीं रहती। इसके अलावा, घर की बड़ी मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी मकान मालिक की होती है, जिससे अचानक खर्च का बोझ नहीं आता।

आखिर सही फैसला क्या है?

घर खरीदना या किराए पर रहना—इसका कोई एक सही जवाब नहीं है। यह फैसला आपकी नौकरी की स्थिरता, बचत की आदत, निवेश समझ और जीवनशैली पर निर्भर करता है।

अगर आपकी नौकरी ट्रांसफर वाली है या जिस इलाके में आप रहना चाहते हैं वहां प्रॉपर्टी बहुत महंगी है, तो किराए पर रहना बेहतर हो सकता है। वहीं, अगर आप लंबे समय तक एक ही जगह रहने की योजना बना रहे हैं और नियमित बचत में मुश्किल होती है, तो होम लोन आपके लिए संपत्ति बनाने का अच्छा जरिया बन सकता है।

कम ब्याज दरें जरूर राहत देती हैं, लेकिन यही अकेला फैसला करने का आधार नहीं होना चाहिए। सबसे सही विकल्प वही है जो आपकी आर्थिक स्थिति, भविष्य की योजनाओं और मानसिक शांति के अनुकूल हो।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी रियल एस्टेट या निवेश संबंधी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।