BJP: केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा, पीएम मोदी ने विपक्ष के नेताओं को ‘दिमागी नक्सली’ नहीं कहा

इंटरनेट डेस्क। पीएम मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए गए भाषण में एक शब्द का प्रयोग किया था, ‘दिमागी नक्सली’ इस शब्द पर विवाद छिड़ गया है। संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्टीकरण दिया है और कहा कि प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेताओं को ‘दिमागी नक्सली’ नहीं कहा है, आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने एक्स पर लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के नेताओं को ‘दिमागी नक्सली’ नहीं कहा है।

फिर कौन हैं दिमागी नक्सली?
मीडिया रिपोटर्स की माने तो केंद्रीय मंत्री ने एक्स पर आगे लिखा, दिमागी नक्सली’ सिर्फ वे लोग हैं जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते, अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं और नॉर्थ-ईस्ट को भारत से अलग करने के लिए ‘चिकन नेक’ को काटना चाहते हैं।

क्या था पीएम का संबोधन?
मीडिया रिपोटर्स की माने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देश के संबोधन में कहा था, नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया। मांओं से उनके नौजवानों को छीन लिया, मां-बाप के सपनों को चूर-चूर कर दिया। नक्सलवाद ने चार दशक तक देश के बहुत बड़े हिस्से को, बड़ी आबादी को, बंदूक की नोक पर दबोचकर रखा था और संविधान की धज्जियां उड़ा दी थीं और भारत के सामान्य नागरिकों की रक्षा में 3500 से ज्यादा पुलिस सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गए। पीएम मोदी ने आगे कहा था, 2014 में आपने जब हमें मौका दिया, हमने संकल्प लिया था कि हम देश को नक्सलवाद से मुक्त करेंगे और आज मुझे खुशी है कि नक्सली-माओवादी हिंसा में आखिरी सांस की भी ताकत नहीं रही। हथियारबंद नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं, ये लोग हिंसा और अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं, समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए, भांति-भांति के दांव खेल रहे हैं, इन दिमागी नक्सलों को पहचानना होगा।

pc- thenewsmill.com, hindustan,newsonair