Jagannath Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ के रथ बनाने में होता इन लकड़ियांे का प्रयोग, जाने कौन बनता हैं
- byShiv
- 16 Jul, 2026
इंटरनेट डेस्क। भारत के प्रसिद्ध और भव्य उत्सवों में से एक जगन्नाथ रथ यात्रा की आज से शुरूआत हो चुकी है। दुनियाभर में लोकप्रिय इस यात्रा को देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं। इस मौके पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा संग अपने-अपने रथों पर सवार होकर नगर का भ्रमण करते हुए गुंडीचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। आप इस रथ यात्रा को जितना साधारण समझ रहे हैं, असल में यह उतना है नहीं। जिन रथों पर भगवान सवार होते हैं, उन्हें बनाने की खास प्रक्रिया होती है और इसकी तैयारी साल भर चलती है। आज जानते हैं इनके बारे में।
जाने तीनों रथों के बारे में
भगवान जगन्नाथ जी के रथ का नाम नंदीघोष है और तीनों रथों में यह सबसे बड़ा होता है। इसे बनाने में 832 लकड़ी के टुकड़ों का प्रयोग किया जाता है और 16 पहिए लगे होते हैं। जगन्नाथ जी की बहन सुभद्रा देवदलन (पद्मरथ) पर सवार होती हैं, जिसे बनाने में 593 लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग किया जाता है। इसमें 12 पहिए लगे होते हैं रथ 31 फीट लंबा और 43 फीट ऊंचा होता है। बलभद्र तालध्वज रथ पर सवार होकर बलभद्र सबसे आगे चलते हैं। इस रथ को बनाने में 763 लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग किया जाता है। इसमें कुल 14 चक्के होते हैं, ऊंचाई 44 फीट और लंबाई 33 फीट होती है।
कौन बनाता है रथ
भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में रथों के निर्माण में सबसे अहम भूमिका महाराणा कारीगर निभाते हैं। इनका काम लकड़ी खोजकर लाना और उन्हें रथशाला में रखना है। इसके बाद गुणकार कारीगर रथ के आकार के मुताबिक लकड़ियों का आकार तय करते हैं। फिर उन्हें उसी आकार और लंबाई-चौड़ाई में काटा जाता है। इसके बाद पहि महाराणा आते हैं, जिनका काम रथ के पहियों को बनाना होता है। रथ निर्माण में लगभग 200 से अधिक सेवक और कारीगर शामिल होते हैं। इसके बाद चंदाकार कारीगर का काम रथों के अलग-अलग बन रहे हिस्सों को आपस में जोड़ने और सजाने का होता है।
लकड़ी का चुनाव
लकड़ी को चुनने से लेकर काटने तक कई नियम हैं। सबसे पहले इन लकड़ियों की पूजा की जाती है। पूजा के बाद उन पेड़ों पर सोने की कुल्हाड़ी से कट लाया जाता है और यह काम महाराणा कारीगरों द्वारा किया जाता है। हालांकि, लकड़ियों पर कट लगाने से पहले इस कुल्हाड़ी को भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को स्पर्श कराया जाता है। इन रथों को बनाने में कुछ चुनिंदा मजबूत और लचीली लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसे बनाने में फासी, भौनरा, आसन, धौरा, नम और सागौन की लकड़ियों का उपयोग किया जाता है।
pc- thehansindia.com






