Wedding Card Tips : शादी के कार्ड में नहीं होनी चाहिए ये चीजें! अगर हैं, तो समझ लीजिए कि होगा कुछ अनचाहा
- byvarsha
- 12 Jun, 2026
pc: navarashtra
शादी हर किसी की ज़िंदगी में एक बहुत ही ज़रूरी और शुभ मौका माना जाता है। इसलिए, शादी की तैयारी में शादी के इनविटेशन को भी खास अहमियत दी जाती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, शादी का इनविटेशन सिर्फ़ मेहमानों को बुलाने का ज़रिया नहीं है, बल्कि इसे नई ज़िंदगी की शुभ शुरुआत माना जाता है। इसलिए, इनविटेशन पर रंग, आकार, डिज़ाइन और टेक्स्ट चुनते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
वास्तु के अनुसार, शादी के इनविटेशन के लिए लाल, पीला, नारंगी, मैरून या सुनहरा रंग शुभ माना जाता है। लाल रंग को प्यार और अच्छी किस्मत का प्रतीक माना जाता है, जबकि पीला और नारंगी रंग पॉजिटिव एनर्जी और शुभ काम से जुड़ा माना जाता है। इसके उलट, वास्तु शास्त्र कहता है कि काले, गहरे भूरे या बहुत नेगेटिव शेड वाले रंगों से बचना चाहिए।
इनविटेशन पर भगवान गणेश, स्वास्तिक, ओम या कलश जैसे शुभ निशान होना भी ज़रूरी माना जाता है। माना जाता है कि अगर भगवान गणेश की कोई खास तस्वीर या निशान हो, तो शादी में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं। हालांकि, देवी-देवताओं की तस्वीरें बहुत मॉडर्न या अस्पष्ट रूप में लगाने से बचना चाहिए। वास्तु के हिसाब से इनविटेशन का शेप भी ज़रूरी माना जाता है। रेक्टेंगुलर या स्क्वेयर शेप के कार्ड शुभ माने जाते हैं। ओवल, गोल या तिकोने डिज़ाइन के साथ-साथ नुकीले कोनों वाले डिज़ाइन नेगेटिव एनर्जी पैदा करने वाले माने जाते हैं। इसलिए, ऐसे डिज़ाइन से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
कार्ड में लिखा लेख सम्मानजनक, साफ़ और पढ़ने में आसान होना चाहिए। “ॐ श्री गणेशाय नमः” या किसी शुभ श्लोक से शुरू करना शुभ माना जाता है। ऐसे फॉन्ट इस्तेमाल करने से बचें जो बहुत मुश्किल हों या पढ़ने में मुश्किल हों। वास्तु शास्त्र के अनुसार, शादी के कार्ड के लिए लेदर फिनिश या केमिकल ग्लॉस पेपर का इस्तेमाल करना सही नहीं माना जाता है। इसकी जगह इको-फ्रेंडली या हाथ से बना पेपर ज़्यादा शुभ माना जाता है। कार्ड छपवाने के बाद, पहला कार्ड मंदिर में गणेश जी के सामने चढ़ाना चाहिए और फिर अपने कुलदेवता के नाम से कार्ड निकालना चाहिए और उसके बाद ही रिश्तेदारों को बांटना शुरू करना चाहिए, यह कई जगहों पर किया जाने वाला रिवाज है।






