EMI से दब रहा है बजट? Debt-to-Income Ratio से जानें कर्ज की सही सीमा और बचाएं अपनी कमाई

आज के समय में लोन लेना आम बात हो गई है। कोई घर के लिए लोन लेता है, कोई गाड़ी के लिए, तो कोई जरूरतों या आपात स्थिति में पर्सनल लोन का सहारा लेता है। समस्या तब शुरू होती है जब अलग-अलग लोन की EMI मिलकर मासिक आय का बड़ा हिस्सा खा जाती है। ऐसे में Debt-to-Income Ratio यानी DTI एक बेहद उपयोगी पैमाना साबित होता है।

यह अनुपात बताता है कि आपकी कमाई का कितना प्रतिशत हिस्सा हर महीने कर्ज चुकाने में जा रहा है। अगर यह अनुपात संतुलित रहे तो आपका बजट सुरक्षित रहता है, लेकिन ज्यादा बढ़ जाने पर वित्तीय दबाव तेजी से बढ़ सकता है।

Debt-to-Income Ratio क्या है?

DTI आपकी कुल मासिक आय की तुलना में आपकी कुल EMI का प्रतिशत है।

मान लीजिए आपकी मासिक आय ₹50,000 है और सभी लोन की कुल EMI ₹20,000 है, तो

DTI = (20,000 ÷ 50,000) × 100 = 40%

यानी आपकी कमाई का 40% हिस्सा पहले से ही कर्ज चुकाने में जा रहा है।

बैंक इसी आंकड़े को देखकर तय करते हैं कि आपको नया लोन देना सुरक्षित है या नहीं।

कितना DTI सुरक्षित माना जाता है?

  • 30% से कम: बहुत सुरक्षित
  • 30% से 40%: सामान्य और स्वीकार्य
  • 40% से 50%: जोखिम बढ़ने लगता है
  • 50% से ऊपर: वित्तीय संकट की आशंका

अगर आपकी आधी से ज्यादा आय EMI में जा रही है, तो अचानक आने वाला कोई भी खर्च आपके पूरे बजट को बिगाड़ सकता है।

DTI कैसे बचाता है EMI के बोझ से

कम DTI होने के फायदे:

  • रोजमर्रा के खर्च के लिए पर्याप्त पैसा बचता है
  • बचत और निवेश करना आसान रहता है
  • आपात स्थिति में नया कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती
  • बैंक आसानी से लोन मंजूर कर देते हैं

ज्यादा DTI होने के नुकसान:

  • नया लोन मिलना मुश्किल हो जाता है
  • ब्याज दरें ज्यादा लग सकती हैं
  • आय में थोड़ी भी कमी से भुगतान में दिक्कत आ सकती है
  • घरेलू खर्च पर कटौती करनी पड़ती है

इस तरह DTI आपको पहले ही चेतावनी दे देता है कि कर्ज आपकी आय पर कितना भारी पड़ रहा है।

लोन अप्रूवल में DTI की अहम भूमिका

बैंक यह देखना चाहते हैं कि आपकी आय में से EMI चुकाने के बाद कितना पैसा बचता है। कम DTI बताता है कि आपके पास अतिरिक्त भुगतान क्षमता है, इसलिए बैंक का भरोसा बढ़ता है।

यही कारण है कि कम DTI वाले लोगों को लोन जल्दी मिलता है और कई बार बेहतर ब्याज दर भी मिल जाती है। जबकि ज्यादा DTI बैंक के लिए जोखिम का संकेत होता है।

DTI कम रखने के आसान तरीके

  1. बेवजह लोन लेने से बचें
    हर इच्छा के लिए कर्ज लेना जरूरी नहीं।
  2. समय से पहले आंशिक भुगतान करें
    बोनस या अतिरिक्त आय से प्रीपेमेंट करने पर EMI का बोझ घटता है।
  3. महंगे कर्ज को एक में जोड़ें
    कई ऊंची ब्याज दर वाले कर्ज को कम दर वाले एक लोन में बदलना फायदेमंद हो सकता है।
  4. आय बढ़ाने पर ध्यान दें
    अतिरिक्त कमाई या वेतन वृद्धि से DTI अपने आप बेहतर हो जाता है।
  5. नया लोन लेने से पहले गणना करें
    नई EMI जोड़ने पर DTI सुरक्षित सीमा में रहेगा या नहीं, यह जरूर देखें।

छोटा सा अनुपात, बड़ा वित्तीय सुरक्षा कवच

Debt-to-Income Ratio सिर्फ बैंक का नियम नहीं, बल्कि आपके लिए वित्तीय सुरक्षा का संकेतक है। यह बताता है कि आपकी कमाई और कर्ज के बीच संतुलन बना हुआ है या नहीं।

अगर आप समय-समय पर अपना DTI जांचते रहें और इसे सुरक्षित दायरे में रखें, तो EMI का बोझ काबू में रहेगा, बजट संतुलित रहेगा और भविष्य की योजनाएं बिना तनाव के आगे बढ़ सकेंगी। समझदारी से लिया गया कर्ज और संतुलित DTI आपको आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखता है।