नाबालिग बच्चे के नाम पर म्यूचुअल फंड निवेश: कितना सुरक्षित, क्या हैं नियम, टैक्स और फायदे-नुकसान
- byrajasthandesk
- 26 Jan, 2026
आजकल माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नाबालिग बच्चों के नाम पर म्यूचुअल फंड में निवेश को एक बेहतर विकल्प मान रहे हैं। पढ़ाई, उच्च शिक्षा या भविष्य के बड़े खर्चों के लिए लंबी अवधि की बचत के रूप में यह तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। हालांकि, निवेश शुरू करने से पहले इसके नियम, सुरक्षा और टैक्स से जुड़े पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है।
बच्चे के नाम पर म्यूचुअल फंड निवेश कैसे होता है?
भारत की सभी एसेट मैनेजमेंट कंपनियां नाबालिग के नाम पर निवेश की अनुमति देती हैं। ऐसे फोलियो में बच्चा ही एकमात्र होल्डर होता है, और जॉइंट होल्डिंग की अनुमति नहीं होती।
जब तक बच्चा 18 साल का नहीं हो जाता, तब तक उसके माता-पिता या कानूनी गार्जियन उस अकाउंट को ऑपरेट करते हैं और सभी निवेश फैसले लेते हैं। 18 साल पूरे होते ही पूरा कंट्रोल बच्चे को मिल जाता है।
क्या यह निवेश पूरी तरह सुरक्षित है?
कानूनी रूप से यह निवेश सुरक्षित माना जाता है क्योंकि यह SEBI के नियमों के तहत होता है। निवेश बच्चे के नाम पर रहता है और किसी भी तरह की धोखाधड़ी की संभावना कम होती है।
हालांकि, सबसे अहम बात यह है कि 18 साल के बाद माता-पिता का कंट्रोल पूरी तरह खत्म हो जाता है। इसलिए निवेश से पहले भरोसा, जिम्मेदारी और बच्चे की वित्तीय समझ को ध्यान में रखना जरूरी है।
निवेश शुरू करने के लिए जरूरी डॉक्युमेंट
- बच्चे की उम्र का प्रमाण (बर्थ सर्टिफिकेट आदि)
- माता-पिता और बच्चे के रिश्ते का प्रमाण
- गार्जियन का KYC
- बैंक अकाउंट डिटेल्स
ये डॉक्युमेंट आमतौर पर पहला निवेश करते समय जमा करने होते हैं।
इस निवेश के फायदे
बच्चे के नाम पर निवेश करने से पैसों का उद्देश्य साफ रहता है। यह बच्चों की पढ़ाई या भविष्य के लिए अलग रखी गई रकम होती है, जिससे माता-पिता में वित्तीय अनुशासन बना रहता है। लंबी अवधि के कारण कंपाउंडिंग का फायदा भी मिलता है।
संभावित नुकसान
सबसे बड़ा जोखिम यही है कि 18 साल के बाद बच्चा चाहे तो पूरा पैसा निकाल सकता है या निवेश का गलत इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा, म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़े होते हैं, इसलिए रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।
नाबालिग के खाते में कौन-कौन से ट्रांजैक्शन हो सकते हैं?
जब तक बच्चा नाबालिग है, गार्जियन उसके खाते से:
- लंपसम निवेश
- SIP
- STP, स्विच
- रिडेम्प्शन
जैसे सभी ट्रांजैक्शन कर सकता है।
18 साल पूरे होने पर क्या बदलाव होता है?
जैसे ही बच्चा बालिग होता है:
- सभी SIP और STP अपने आप बंद हो जाती हैं
- गार्जियन का अधिकार खत्म हो जाता है
- फोलियो अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया जाता है
बालिग होने के बाद अकाउंट कैसे चालू होगा?
बच्चे को खुद आवेदन देकर फोलियो को ‘माइनर’ से ‘मेजर’ में बदलवाना होता है। इसके लिए नया KYC और जरूरी डॉक्युमेंट जमा करने होते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अकाउंट फिर से एक्टिव हो जाता है।
टैक्स नियम: नाबालिग और बालिग होने पर
अगर 18 साल से पहले निवेश से मुनाफा होता है, तो वह माता-पिता की आय में जुड़ता है और उसी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।
18 साल के बाद बच्चा अलग टैक्सपेयर माना जाता है। आमतौर पर इस उम्र में इनकम कम होती है, इसलिए टैक्स छूट और LTCG की सीमा का फायदा मिल सकता है।
नाबालिग बच्चे के नाम पर म्यूचुअल फंड में निवेश सही प्लानिंग और सोच-समझकर किया जाए तो यह भविष्य के लिए एक मजबूत वित्तीय आधार बना सकता है। लेकिन 18 साल के बाद कंट्रोल ट्रांसफर होने के पहलू को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। निवेश से पहले किसी वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।






