Old vs New Tax Regime: इनवेस्टमेंट प्रूफ सब्मिट करते समय एंप्लॉयी किस ऑप्शन को चुनें? जानिए सही फैसला कैसे लें

जैसे ही कंपनियां FY 2025-26 के लिए इनवेस्टमेंट प्रूफ मांगना शुरू करती हैं, कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है – ओल्ड टैक्स रीजीम चुनें या नई टैक्स रीजीम? यह फैसला सिर्फ कागजी नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आपकी सैलरी, टीडीएस कटौती और सालाना टैक्स सेविंग पर पड़ता है।

एक बार आपने जो विकल्प चुना, उसी के आधार पर कंपनी हर महीने आपकी सैलरी से टीडीएस काटेगी।

यह फैसला क्यों जरूरी है?

जब आप एंप्लॉयर को बताते हैं कि आपने कौन-सी टैक्स रीजीम चुनी है, तो कंपनी का फाइनेंस डिपार्टमेंट उसी आधार पर टैक्स कैलकुलेट करता है।

  • ओल्ड रीजीम में आपकी छूट और डिडक्शंस को ध्यान में रखा जाता है
  • नई रीजीम में कम टैक्स स्लैब्स के हिसाब से सीधा टैक्स लगाया जाता है

गलत चुनाव करने पर या तो आप ज्यादा टैक्स भर देंगे या फिर टैक्स बचाने का मौका गंवा देंगे

ओल्ड टैक्स रीजीम क्या फायदे देती है?

ओल्ड रीजीम उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो नियमित निवेश और खर्च करते हैं। इसमें कई तरह की छूट और डिडक्शन मिलती हैं:

  • सेक्शन 80C (₹1.5 लाख तक) – PF, PPF, ELSS, LIC, बच्चों की फीस
  • सेक्शन 80D – हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम
  • होम लोन बेनेफिट – प्रिंसिपल + ब्याज
  • HRA एक्सेम्प्शन
  • LTA बेनेफिट
  • एजुकेशन लोन ब्याज (80E)
  • दान पर छूट (80G)

हालांकि, इसमें टैक्स स्लैब्स ऊंचे हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर आपकी सालाना इनकम करीब ₹25 लाख है, तो ओल्ड रीजीम तभी फायदेमंद होती है जब आपके डिडक्शन करीब ₹8 लाख तक हों।

नई टैक्स रीजीम में क्या मिलता है?

नई टैक्स रीजीम को सरल बनाने के लिए लाया गया है। इसमें मिलता है:

  • ₹12 लाख तक की इनकम पर जीरो टैक्स
  • ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन
  • कम टैक्स स्लैब्स
  • PF और NPS में एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन पर टैक्स बेनेफिट (80CCD(2))

लेकिन इसमें 80C, 80D, HRA, LTA, और होम लोन ब्याज जैसे अधिकतर डिडक्शंस नहीं मिलते।

ओल्ड रीजीम किसके लिए सही है?

ओल्ड रीजीम उन एंप्लॉयी के लिए बेहतर है जो:

  • घर का किराया देते हैं और HRA क्लेम करते हैं
  • होम लोन की EMI भरते हैं
  • टैक्स सेविंग स्कीम्स में निवेश करते हैं
  • हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भरते हैं
  • बच्चों की ट्यूशन फीस देते हैं
  • LTA और एजुकेशन लोन का फायदा लेते हैं

नई रीजीम किसके लिए सही है?

नई रीजीम उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो:

  • कम या बिल्कुल निवेश नहीं करते
  • HRA, LTA क्लेम नहीं करते
  • हर महीने ज्यादा इन-हैंड सैलरी चाहते हैं
  • डॉक्युमेंट्स के झंझट से बचना चाहते हैं

CA मृणाल मेहता के अनुसार, जो लोग डिडक्शन क्लेम नहीं करते, उनके लिए नई रीजीम ज्यादा बचत देती है।

ओल्ड रीजीम में कौन-से डॉक्युमेंट्स देने होते हैं?

अगर आप ओल्ड रीजीम चुनते हैं, तो कंपनी आपसे ये प्रूफ मांग सकती है:

HRA के लिए

  • रेंट रसीद
  • रेंट एग्रीमेंट
  • मकान मालिक का PAN (अगर सालाना रेंट ₹1 लाख से ज्यादा है)

80C इनवेस्टमेंट

  • PF स्टेटमेंट
  • LIC रसीद
  • ELSS प्रूफ
  • PPF स्लिप
  • बच्चों की फीस रसीद

80D – हेल्थ इंश्योरेंस

  • प्रीमियम रसीद

होम लोन

  • ब्याज सर्टिफिकेट
  • प्रिंसिपल सर्टिफिकेट

LTA

  • ट्रैवल टिकट, बोर्डिंग पास

अन्य

  • एजुकेशन लोन ब्याज सर्टिफिकेट
  • 80G डोनेशन रसीद

नई रीजीम में प्रूफ की जरूरत नहीं

नई टैक्स रीजीम की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें कोई इनवेस्टमेंट प्रूफ सब्मिट करने की जरूरत नहीं होती। कंपनी सीधे स्लैब के हिसाब से टीडीएस काटती है।

नई रीजीम में कौन-सी छूट मिलती है?

  • 80CCD(2) – NPS में एंप्लॉयर का कंट्रिब्यूशन
  • किराए पर दिए गए घर के होम लोन का ब्याज

आखिर किसे चुनें?

ओल्ड या नई – कोई भी रीजीम सभी के लिए परफेक्ट नहीं है। सही चुनाव इस पर निर्भर करता है:

  • आपकी सैलरी
  • आपका निवेश
  • आपके खर्च
  • आपके फाइनेंशियल गोल्स

अगर आप सेविंग्स और इनवेस्टमेंट करते हैं, तो ओल्ड रीजीम फायदेमंद है। अगर आप सादगी और कम झंझट चाहते हैं, तो नई रीजीम बेहतर विकल्प हो सकती है।

इनवेस्टमेंट प्रूफ सब्मिट करने से पहले दोनों का टैक्स कैलकुलेशन जरूर करें – यही स्मार्ट तरीका है ज्यादा बचत का।